उन्होंने बताया कि यह हालात इसलिए है कि इस विभाग में टेंडर प्रक्रिया पर गिनी-चुनी कंपनियों का कब्जा है। यहां रोटेशन में चुनिंदा ठेकेदारों को काम मिलता है। इनमें फलोदी कंस्ट्रक्शन व गुप्ता कंस्ट्रक्शन प्रमुख है। आखिर गुप्ता कंस्ट्रक्शन के जगदीश गुप्ता पर सरकार इतनी मेहरबान क्यों है।
यह किसानों के साथ धोखा
पटवारी ने कहा कि चुनिंदा कंपनियां काम लेकर घटिया सामग्री लगा रही है। कुछ परियोजनाओं में सस्ते एचडीपीई पाइप लगाकर महंगे डीआई पाइप का भुगतान निकाला गया है। यह किसानों के साथ धोखा है। उन्होंने सवाल उठाया कि पिछले डेढ़ वर्ष से जल संसाधन विभाग में बड़े टेंडर क्यों नहीं लगाए गए।
पटवारी ने मांग करी कि जल संसाधन विभाग की सभी बैंक गारंटियों की तत्काल जांच कराई जाए और इन विभागों में ई-बैंक गारंटी प्रणाली लागू की जाए। साथ ही 2023-24 के टेंडरों की न्यायिक जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि 15 दिन में कार्रवाई नहीं की तो सीबीआई दफ्तर में एक डेलिगेशन भेजकर इस पूरे मसले की दस्तावेज सहित जांच करने का आवेदन देगी।