भोपाल में खाली चल रही मेट्रो, नहीं मिल रहे पैसेंजर, राजधानी में मेट्रो क्यों बनी घाटे का सौदा
Updated on
12-03-2026 11:52 AM
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का ड्रीम मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट शुरूआती चरण में उत्साह जनक नहीं रहा। पटरी पर पहली बार दौड़ने के महज तीन महीनों में ही यह लगभग खाली दौड़ रही है। बीते करीब एक महीने से रोजाना इसके पैसेंजर सैकड़ा के आसपास ही पहुंच रही है। ट्रेनों के फेरे भी घटाने पड़े, फिर भी लोग मेट्रो में सफर करने में रूचि नहीं दिखा रहे। कई दफा तो ट्रेन पूरे रूट पर खाली दौड़ती नजर आ रही है।भोपाल में बड़ी उम्मीद और उत्साह के साथ प्रारंभ हुई मेट्रो रेल को पहले चरण में यात्रियों की कमी से जूझना पड़ रहा है। कई दफा तो खाली ट्रेन ही पटरी पर दौड़ रही है। दरअसल 21 दिसंबर को जब मेट्रो का शुभारंभ हुआ था, उस समय रोजाना खूब पैसेंजर मेट्रो की सवारी का आनंद ले रहे थे, लेकिन धीरे—धीरे सवारियां कम होती जा रही हैं। 800 की क्षमता वाली मेट्रो को बमुश्किल एक सैकड़ा पैसेंजर भी नहीं मिल पा रहे।
स्टेशनों पर दिख रहा सूनापन
मेट्रो ट्रेन के अधिकांश स्टेशनों पर दिन के समय सूनापन दिख रहा है। शुरूआती दिनों में लोग बड़े उत्साह से मेट्रो स्टेशनों पर पहुंच रहे थे। मेट्रो रेल प्रबंधन ने अपने आंकलन में शौकिया तौर पर मेट्रो में घूमने आने वाले पैसेंजर को रेग्युलर पैसेंजर मान लिया था, लेकिन बाद में पता चला कि, वे रेग्युलर पैसेंजर नहीं थी। इसी कारण मेट्रो स्टेशनों पर सूनापन साफ नजर आ रहा है। कई दफा तो खाली कोच लेकर मेट्रो रूट पर पूरा फेरा कर लेती है।
पहले 17 फेरे थे, घटाकर 13 किए गए
मेट्रो अधिकारियों से मिली जानकारी अनुसार प्रबंधन ने शुरूआती रूझान को देखते हुए मेट्रो प्रबंधन ने 8 स्टेशनों के बीच कुल 17 फेरे लगाने का प्लान बनाकर इसे लागू किया था। धीरे-धीरे यात्रियों की कमी होती गई तो प्रबंधन ने फेरे घटाने का फैसला लिया। फिलहाल इसके 13 फेरे लग रहे हैं। कुछ ट्रिप में तो एक भी पैंसेजर नहीं मिल पाता।
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