- वे चीनी इंजीनियरों के मामले का जिक्र करते हैं, जिन्होंने तीस्ता मास्टर प्लान तैयार किया था। इसकी बहुत तारीफ हुई थी लेकिन बाद में कई कमियां सामने आने पर इसे वापस लिया गया। पेश की गई संशोधित योजना पेश में भी गंभीर कमियां पाई गई हैं।
- मास्टर प्लान को लेकर बरती गई गोपनीयता ने जल विशेषज्ञों और NGO समुदाय को उलझन में डाल दिया है। सवाल ये है कि जिस प्रोजेक्ट का असर लाखों लोगों पर पड़ेगा, उसे लेकर इतनी गोपनीयता क्यों बरती जानी चाहिए।
- बांग्लादेश के लोग ऐसे आश्वासनों से गुमराह नहीं होंगे कि प्रस्तावित गंगा बैराज केवल सर्दियों में इस्तेमाल के लिए मॉनसून का पानी जमा करेगा। उन्हें सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में इससे भारत के फरक्का जैसे खराब नतीजे ना मिलें।