तो क्या पहले बैठकें बिना एजेंडे के होती थी
आयोग ने प्रेस नोट में कहा गया है कि कि अब से बैठकों का एजेंडा पहले जारी किया जाएगा, कार्यवाही का विवरण दिया जाएगा और मामलों की उचित सुनवाई होगी। इस पर तंज कसते हुए पूर्व CEC ने पूछा कि क्या पहले बैठकें बिना किसी तय एजेंडे और विवरण के होती थीं? यह बेहद हास्यास्पद है। उन्होंने आगे कहा कि यदि किसी चुनाव आयुक्त की असहमति को बाईपास करके या बिना पूर्ण बहुमत के फैसले लिए गए हैं, तो वे सभी निर्णय 'पूर्ण रूप से गैरकानूनी' हैं।मतदाता सूची संशोधन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश में दो प्रकार के कानून नहीं हो सकते। उन्होंने आपत्ति जताई कि फॉर्म 6 के इस्तेमाल और डिजिटल प्रक्रियाओं को लेकर जो गड़बड़ियां हुईं, उसे लेकर आयोग को पहले की स्थिति साफ करनी चाहिए थी।