प्रस्ताव में दोहराई यह बात
सरकार ने प्रस्ताव में यह भी दोहराया कि कावेरी बेसिन पहले से ही जल संकटग्रस्त क्षेत्र है और सुप्रीम कोर्ट ने उपलब्ध जल का बंटवारा पहले ही तय कर दिया है। ऐसे में इस बेसिन में नई परियोजनाएं शुरू करना या अतिरिक्त पानी का उपयोग करना नियमों के खिलाफ होगा। मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि कावेरी मुद्दा तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच बेहद संवेदनशील है और इस पर किसी भी प्रकार का फैसला सभी राज्यों की सहमति से ही होना चाहिए। प्रस्ताव के अंत में तमिलनाडु सरकार द्वारा किसानों के हितों की रक्षा के लिए उठाए गए सभी कदमों को सदन ने समर्थन दिया। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर दक्षिण भारत की राजनीति में कावेरी जल विवाद को केंद्र में ला दिया है।