कोर्ट ने कहा, ‘इस मामले पर कोर्ट की रिव्यू कमेटी ने भी सरकार के फैसले की जांच की थी। सरकार ने पूरी समझदारी से काम लिया है, इसमें किसी तरह की जल्दबाजी या लापरवाही नहीं दिखती।’
केंद्र सरकार ने 16 जून को NEET री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थायी बैन लगा दिया था। इसके बाद टेलीग्राम ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। गुरुवार को मामले की सुनवाई पूरी हुई और कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
कोर्ट ने पूछा था- 15 करोड़ यूजर्स के अधिकार को कैसे रोक सकते हैं
कोर्ट में गुरुवार को सरकार ने दलील दी थी कि री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इस पर कोर्ट ने पूछा था कि कुछ परीक्षार्थियों की वजह से 15 करोड़ टेलीग्राम यूजर्स के अधिकारों पर रोक कैसे लगाई जा सकती है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि टेलीग्राम में एक अकाउंट से 40 बॉट बन सकते हैं, जबकि वाट्सएप में हर यूजर पर एक बॉट होता है। टेलीग्राम साइबर क्राइम, पेपर लीक, चाइल्ड पोर्नोग्राफी, आतंकवाद बढ़ाने और वित्तीय धोखाधड़ी में इस्तेमाल हो रहा है।
इसके बाद सरकार ने 5 दावे किए…
टेलीग्राम का दावा- NEET से जुड़े 900 से ज्यादा लिंक हटाए
टेलीग्राम का पक्ष एडवोकेट ध्रुव मेहता ने रखा। उन्होंने कोर्ट में कहा कि जो कुछ हुआ, हम सब जानते हैं। बहुत सारे छात्र प्रभावित हुए। दूसरा पहलू यह है कि क्या उस एक घटना को रोकने के लिए पूरे प्लेटफॉर्म को ब्लॉक किया जा सकता है?
टेलीग्राम ने बताया कि 9 जून को अधिकारियों से विशिष्ट यूआरएल मिलने के एक घंटे के भीतर ही प्रतिबंधित सामग्री को हटा दिया। यह भी दावा किया कि उसने गैर-कानूनी NEET सामग्री से जुड़े 900 से ज्यादा लिंक हटाए हैं। नियमों के उल्लंघन की पहचान करने के लिए AI, मशीन लर्निंग टूल और मैन्युअल मॉडरेशन का इस्तेमाल किया है।