बायजू रवींद्रन को सिंगापुर की अदालत से राहत, छह साल जेल की मिली थी सजा, 15 जून तक करना था सरेंडर
Updated on
13-06-2026 12:24 PM
नई दिल्ली: सिंगापुर उच्च न्यायालय ने शिक्षा-प्रौद्योगिकी कंपनी बायजू के संस्थापक बायजू रवींद्रन के खिलाफ अदालत की अवमानना मामले में दी गई छह महीने की सजा पर रोक लगा दी है। शुक्रवार को रवींद्रन ने एक बयान में यह जानकारी दी। अदालत ने 25 मई, 2026 के आदेश में कथित रूप से खुलासा संबंधी निर्देशों का पालन न करने पर रवींद्रन को छह महीने की कैद की सजा सुनाई थी और उन्हें 15 जून तक आत्मसमर्पण करने को कहा था। हालांकि, उनके खिलाफ कोई गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं किया गया था।
बयान के मुताबिक, सिंगापुर उच्च न्यायालय की सामान्य पीठ ने 10 जून, 2026 को रवींद्रन की याचिका पर सुनवाई करते हुए 25 मई के अवमानना आदेश के तहत जारी गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण से जुड़े निर्देशों पर रोक लगा दी। इस फैसले के बाद रवींद्रन को अब आत्मसमर्पण करने की आवश्यकता नहीं है और उनकी सजा फिलहाल लागू नहीं होगी।
रवींद्रन की प्रतिक्रिया
अदालत ने रवींद्रन को 90,000 सिंगापुर डॉलर (करीब 70,500 अमेरिकी डॉलर) का कानूनी खर्च अदा करने और सिंगापुर स्थित ‘बीईएएआर इन्वेस्टको पीटीई’ इकाई में उनकी हिस्सेदारी से जुड़े दस्तावेज पेश करने का भी निर्देश दिया था। बयान में कहा गया कि अवमानना के निष्कर्ष के खिलाफ अपील भी दायर की गई है। रवींद्रन ने बयान में कहा कि पक्षकारों के आपसी समझौते के प्रयासों में लगे होने के बीच गड़बड़ी की भ्रामक धारणा बनाने की कोशिश दुर्भाग्यपूर्ण है।उन्होंने कहा, 'मैं उचित कानूनी प्रक्रिया के जरिए इस धारणा को ठीक करने के लिए प्रतिबद्ध हूं। न तो मैंने और न ही अन्य संस्थापकों ने कथित विवादित राशि का कोई हिस्सा व्यक्तिगत रूप से प्राप्त किया है। इसके विपरीत, मेरे परिवार और मैंने कंपनी में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की निजी पूंजी लगाई है।'
क्या है मामला?
यह मामला कतर निवेश प्राधिकरण (क्यूआईए) की एक सब्सिडियरी ने दायर किया था, जिसने कंपनी में फंडिंग दौर में निवेश किया था। रवींद्रन के वकीलों ने कहा कि अवमानना आदेश को निरस्त कराने के लिए आवश्यक अपील दायर कर दी गई है और यह मामला किसी आपराधिक आरोप या धोखाधड़ी से संबंधित नहीं है।
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