इजरायल कर रहा है कॉकरोच ड्रोन बनाने की कोशिश
2009 से अब तक इजरायली रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर कम से कम 30 अमेरिकी विश्वविद्यालयों के साथ कम से कम 70 रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू किया गया है। इन प्रोजेक्ट्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन झुंड जैसी चीजें शामिल हैं। मिसाइल गाइडेंस, क्वांटम सेंसिंग, ऑटोनॉमस सिस्टम और बायो-इंस्पायर्ड रोबोटिक्स। सबसे दिलचस्प क्षेत्रों में से एक है कीड़ों से प्रेरित रोबोटिक सिस्टम का विकास। कॉकरोच का आकर्षण उसके रूप-रंग में नहीं बल्कि उसकी बायोलॉजी में है। कॉकरोच बहुत तंग जगहों से निकल सकते हैं, ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चल सकते हैं और ऐसे माहौल में भी काम करते रह सकते हैं जो पारंपरिक रोबोटिक सिस्टम के लिए मुश्किल साबित हो सकते हैं।इजरायल कर रहा है 'माइक्रो-ड्रोन स्वार्म' पर काम
यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के रिसर्चर्स ने इजरायली रक्षा मंत्रालय के एक वैज्ञानिक के साथ मिलकर इंचवर्म यानि एक तरह का कीड़ा से प्रेरित रेंगने वाले रोबोट पर भी काम किया है। इनके इस्तेमाल के कई और तरीके हो सकते हैं जो सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं हैं। ऐसे रोबोट का इस्तेमाल जासूसी, आपदा के समय मदद, खोज और बचाव, सुरंगों की जांच और गिरी हुई इमारतों के निरीक्षण के लिए किया जा सकता है।लेकिन शहरी इलाकों में होने वाली लड़ाई में इनकी सैन्य अहमियत बहुत बढ़ जाएगी क्योंकि वहां इमारतें, जमीन के नीचे बने रास्ते, गुफाएं और मलबे ऐसे हालात पैदा करते हैं जिनमें आम गाड़ियां और बड़े ड्रोन ज्यादा काम नहीं आते। इजरायल के लिए ये अहम इसलिए भी होंगे क्योंकि हमास ने गाजा में सुरंगों का जो नेटवर्क तैयार कर रखा है उसे भेदना अत्यंत मुश्किल है।