अगर संकट लंबा खिंचता है तो...
सेनगुप्ता बताते हैं कि अगर तेल की कीमतें एक तिमाही या उससे ज्यादा समय तक 100 डॉलर से ऊपर बनी रहती हैं तो क्या होगा। सरकार की राजकोषीय रूप से इस झटके को झेलने की क्षमता पर लगातार दबाव बढ़ता जाएगा। - यानी पेट्रोल पंपों की कीमतों को स्थिर रखना और उर्वरक की पूरी लागत उठाना मुश्किल होगा। किसी न किसी मोड़ पर इसका बोझ उपभोक्ताओं पर डालना जरूरी हो जाएगा।अगर ऐसा होता है, तो RBI के लिए समीकरण काफी हद तक बदल जाएंगे। महंगाई अनुमान से ज्यादा बढ़ सकती है और साल के आखिर में ब्याज दरों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।