भारत की पॉलिसी से घबराया चीन, एक के बाद एक कर रहा पंगे, रोकना चाहता है रास्ता
Updated on
13-05-2026 06:54 PM
नई दिल्ली: भारत के आत्मनिर्भरता के प्रयास चीन को चुभ रहे हैं। सोलर एनर्जी और आईटी जैसे क्रिटिकल सेक्टर में भारत की स्कीमें (मसलन पीएलआई स्कीम) की राह में वह अड़ंगे डालने में लगा है। बार-बार पेंच फंसाने की कोशिश से उसकी घबराहट का साफ पता चलता है। इसके लिए उसने विश्व व्यापार संगठन (WTO) को जरिया बनाया है। अब बीजिंग ने डब्ल्यूटीओ की विवाद समाधान संस्था से एक पैनल बनाने की अपील की है। यह अपील उस मामले के संबंध में है जो चीन ने भारत के खिलाफ दायर किया है। यह मामला नई दिल्ली की ओर से सोलर सेल, मॉड्यूल और इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी क्षेत्रों के लिए दिए गए सहायता उपायों से जुड़ा है।
भारत का अपनी पॉलिसी पर रुख काफी साफ और रणनीतिक रहा है। इसे वह सिर्फ एक व्यापारिक विवाद के तौर पर नहीं, बल्कि अपनी आर्थिक संप्रुभता और 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' के तौर पर देखता है।
पिछले साल दिसंबर में चीन ने विवाद पर आपसी सहमति से कोई समाधान निकालने के लिए अर्जी दी थी। हालांकि, विवाद पर आपसी सहमति से कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद फिर ताजा अपील की गई है।
आपसी सहमति से समाधान निकालने के मकसद से 10 फरवरी, 2026 को ये बातचीत हुई थी।
विश्व व्यापार संगठन (WTO) के एक संदेश में कहा गया है, 'दुर्भाग्य से, ये बातचीत विवाद को सुलझाने में फेल रही। इसलिए, चीन ने एक पैनल गठित करने के लिए...अनुरोध प्रस्तुत किया है।'
चीन का आरोप क्या है?
चीन ने आरोप लगाया है कि भारत की ओर से कुछ तकनीकी उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ या आयात शुल्क, और आयातित सामानों के बजाय घरेलू उत्पादों के इस्तेमाल जैसे उपाय चीनी सामानों के साथ भेदभाव करते हैं।चीन इन क्षेत्रों के तहत आने वाले सामानों का एक प्रमुख निर्यातक है। उसने दावा किया था कि ये सहायता उपाय और प्रोत्साहन डब्ल्यूटीओ के 'जनरल एग्रीमेंट्स ऑन टैरिफ एंड ट्रेड्स 1994' (GATT 1994), 'सब्सिडी और काउंटरवेलिंग उपायों पर समझौता' और 'व्यापार-संबंधित निवेश उपायों पर समझौता' से जुड़े नियमों का उल्लंघन करते हैं।
भारत का पूरे मामले में रुख क्या है?
भारत इस मामले में कड़ा रुख अपनाए हुए है।
वह अपनी PLI योजनाओं और सब्सिडी का बचाव करता है।
इसे वह भेदभावपूर्ण नहीं बल्कि 'आत्मनिर्भर भारत' और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी मानता है।
भारत का तर्क है कि सौर और आईटी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना उसकी संप्रभुता का हिस्सा है।
वह चीनी डंपिंग से अपने स्थानीय उद्योगों को बचाने के लिए WTO के नियमों के तहत ही काम कर रहा है।
चीन के ताजा कदम का मतलब क्या है?
डब्ल्यूटीओर के नियमों के अनुसार, परामर्श का अनुरोध करना विवाद समाधान प्रक्रिया का पहला कदम होता है। इसके बाद इस मामले में एक पैनल गठित करने का अनुरोध किया जा सकता है ताकि उठाए गए मुद्दे पर फैसला दिया जा सके। चूंकि भारत के साथ परामर्शों से कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकला तो चीन डब्ल्यूटीओर से इस मामले में एक पैनल गठित करने का अनुरोध किया है।
जनवरी में भी चीन ने उठाया था मामला
जनवरी में भी चीन ने डब्ल्यूटीओ की विवाद समाधान संस्था से एक अन्य मामले में पैनल गठित करने का अनुरोध किया था। यह मामला भी भारत के खिलाफ दायर किया गया था। नई दिल्ली की ओर से यह ऑटो, बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए शुरू की गई प्रोत्साहन योजनाओं से जुड़ा था। इस मामले में भी द्विपक्षीय बातचीत विवाद को सुलझाने में असफल रही थी।
चीन के साथ भारत व्यापार घाटा बहुत ज्यादा
चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान चीन को भारत का निर्यात 36.66 फीसदी बढ़कर 19.47 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। वहीं, आयात 16 फीसदी बढ़कर 131.63 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। व्यापार घाटा 2024-25 के 99.2 अरब अमेरिकी डॉलर की तुलना में 2025-26 में बढ़कर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 112.6 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया।
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