पीएम मोदी के 40% के पास एक से अधिक मंत्रालय
- इस समय मोदी कैबिनेट में 12 ऐसे मंत्री हैं, जिन के पास कई-कई पोर्टफोलियो हैं। यह संख्या करीब 40% होती है।
- दो कैबिनेट मंत्रियों के पास तो तीन-तीन बड़े मंत्रालयों का जिम्मा है।
- नीट-यूजी विरोध प्रदर्शनों की वजह से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया तो केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा जैसे बड़े और महत्वपूर्ण मंत्रालय की भी जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।
- सोमवार को केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को भी राज्यसभा का टिकट नहीं मिला, जिससे लगता है कि अगले महीने कार्यकाल पूरा होने से पहले उन्हें भी पेट्रोलियम मंत्रालय छोड़ना पड़ सकता है।
- इसी तरह केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा का भी नाम राज्यसभा उम्मीदवारों की लिस्ट में नहीं है और अगर उन्हें दोबारा से राज्यसभा नहीं भेजा गया तो उन्हें भी मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है।
- हरदीप सिंह पूरी और बीएल वर्मा का यह दूसरा राज्यसभा कार्यकाल है।
- इससे पहले जून में तत्कालीन केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन को भी बीजेपी ने दोबारा राज्यसभा में नहीं भेजा, जिसके चलते उन्हें अपना मंत्री पद छोड़ना पड़ा। इन दोनों का तो राज्यसभा का पहला ही कार्यकाल था।
केंद्रीय मंत्रिपरिषद में रह गए मात्र 68 मंत्री
- इस समय अमित शाह, जेपी नड्डा, शिवराज सिंह चौहान, निर्मला सीतारमण, मनोहर लाल खट्टर, अश्विनी वैष्णव, प्रह्लाद जोशी और जी किशन रेड्डी के पास एक से ज्यादा मंत्रालयों के प्रभार हैं।
- केंद्रीय मंत्रिपरिषद में ज्यादा से ज्यादा 81 मंत्री हो सकते हैं। इस समय मोदी सरकार में 29 कैबिनेट मंत्री, 5 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और 34 राज्यमंत्री हैं।
- इस तरह से अधिकतम 81 मंत्रियों के मुकाबले मोदी मंत्रिपरिषद में कुल 68 मंत्री हैं, जो कि कुल संख्या का 84% है। अगर पुरी और वर्मा भी बाहर हुए तो मंत्रियों की संख्या घटकर 66 ही रह जाएगी।
- आमतौर पर केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 75 मंत्री होते हैं, लेकिन निर्धारित अधिकतम संख्या के मुकाबले अभी 13 मंत्रियों की और गुंजाइश है। और पुरी और वर्मा के जाने के बाद तो कम से कम 9 मंत्रियों को शामिल करने की जरूरत हो जाएगी।
यूपी, पंजाब चुनावों का दिख सकता है असर
- पीएम मोदी का तीसरा कार्यकाल जून, 2024 में हुआ, जिसमें उनके दूसरे कार्यकाल के ज्यादातर मंत्रियों को जगह मिल गई।
- अब इस सरकार ने अपने मौजूदा कार्यकाल के लगभग आधा हिस्सा पूरा कर लिया है, इसलिए भी एक मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की पूर्ण संभावना नजर आ रही है।
- अगला मंत्रिमंडल विस्तार नवंबर-दिसंबर में संभावित संसद के शीतकालीन सत्र से पहले कभी भी हो सकता है।
- अभी इस सरकार में एक भी मुस्लिम और क्रिश्चियन चेहरा नहीं है। हरदीप पुरी के बाद सिख प्रतिनिधित्व भी जीरो हो सकता है।
- अल्पसंख्यक चेहरों में सिर्फ किरेन रिजिजू हैं, जो बौद्ध हैं।
- अगला जो भी विस्तार होगा, उसमें आने वाले विधानसभा चुनावों पर गौर किया जा सकता है।
- मतलब, यूपी के कुछ और बड़े चेहरों को जगह मिल सकती है और पंजाब चुनाव को देखते हुए किसी सिख नेता को भी मंत्री बनाए जाने की संभावना है। इसी तरह से मोदी सरकार किसी क्रिश्चियन नेता को भी जगह दे सकती है।