पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी के बाद ट्रेन का खाना महंगा होगा? रेलवे कैटरर्स की मांग पढ़िए
Updated on
20-05-2026 01:30 PM
नई दिल्ली: रेलवे बोर्ड (Railway Board) के गलियारों में इन दिनों 'बहती गंगा में हाथ धोना' मुहावरे का खूब उपयोग हो रहा है। रेलवे से जुड़े लोग बताते हैं कि ईरान-इजरायल युद्ध के बाद पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतें की क्या बढ़ीं, रेलवे के सभी सप्लायर या वेंडर (Railway Vendor) इसका लाभ उठाना चाहते हैं। बाजार में तो चाय-समोसे से लेकर चाट-पकौड़ी और छोले-भठूरे का ठेला लगाने वालों ने दाम बढ़ा दिया। अब रेलवे की ट्रेनों में कैटरिंग सर्विस (Catering Services) उपलब्ध कराने वाले ठेकेदारों ने भी अपनी मांग की सूची को आगे बढ़ा दिया है।
रेलवे कैटरर्स ने बात उठायी
ट्रेन में खानपान सेवा उपलब्ध कराने वाले ठेकेदारों का एक संगठन है इंडियन रेलवे मोबाइल कैटरर्स एसोसिएशन (IRMCA)। इस संगठन के अध्यक्ष हैं शरण बिहारी अग्रवाल। ये आरके बिजनेस ग्रुप (RK Business Group) के मालिक बताये जाते हैं। जानकारों का कहना है कि रेलवे की प्रीमियम (राजधानी, शताब्दी और वंदे भारत एक्सप्रेस) तथा महत्वपूर्ण ट्रेनों वाले क्लस्टर-ए की करीब 70 फीसदी ट्रेनों की पेंट्री सर्विस इसी ग्रुप की कंपनियां संभालती हैं। इन्हीं के हस्ताक्षर से पिछले दिनों एक पत्र इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कार्पोरेशन (IRCTC) के डायरेक्टर कैटरिंग सर्विसेज (DCS) को भेजा गया है।
क्या है मांग
इंडियन रेलवे मोबाइल कैटरर्स एसोसिएशन के इस पत्र में कहा गया है कि आईआरसीटीसी ने पेंट्री कार की खाने-पीने वाली चीजों के दाम साल 2019 में ही तय किया है। तब से इन चीजों के दाम 250% तक बढ़ गए हैं। साथ ही स्टाफ का वेतन भी बढ़ा है। इसलिए उसी हिसाब से खाने-पीने की चीजों के दाम रिवाइज किए जाएं। इनका कहना है कि खाने-पीने की चीजों की क्वालिटी को मेंटेन करने के लिए ऐसा करना जरूरी है।
क्या होगा असर
भारतीय रेल (Indian Railways) की ट्रेन में पेंट्री सर्विस दो तरह से मिलती है। एक है प्री-पेड प्रोडक्ट्स और दूसरा है पोस्ट-पेड प्रोडक्ट्स। राजधानी, शताब्दी और वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों में यात्री पहले ही पैसा जमा कर देते हैं इसलिए उन ट्रेनों में मिलने वाली खाने-पीने की चीजों को प्री-पेड कहा जाता है। अन्य ट्रेनों में यात्री सामान लेने के बाद पैसे चुकाते हैं इसिलए वे पोस्ट-पेड कहलाते हैं। इस संगठन ने मांग की है कि दोनों तरह के खाने-पीने की चीजों की कीमत तत्काल प्रभाव से बढ़ाई जाए। यदि सामानों के दाम में 250 फीसदी की बढ़ोतरी की थ्योरी को मान ली जाए तो यात्रियों पर इतना बोझ तो बढ़ ही जाएगा।
रेलवे टेंडर में क्या प्रावधान है
रेलवे के जानकार बताते हैं कि ट्रेनों में पेंट्री कार का टेंडर 'फिक्स रेट सप्लाई' पर होता है। टेंडर की अवधि आमतौर पर जो भी हो, उसमें दाम नहीं बढ़ा सकते। इस टेंडर के क्लॉज में बीच की अवधि में रेट बढ़ाने का कहीं भी जिक्र नहीं है। मतलब कि जिस अवधि के लिए किसी कंपनी ने टेंडर लिया है, उसी रेट पर काम करना होगा। कोई ठेकेदार बीच में ही दाम बढ़ाने का दवाब नहीं डाल सकता है। यदि रेलवे रेट रिवाइज करता है तो उस डेट के बाद होने वाले टेंडर पर ही वह लागू होगा। पुराने टेंडर में पुराना रेट ही चलेगा।
क्या घाटे में करेंगे काम
यहां सवाल उठता है कि यदि बाजार में महंगाई बढ़ गई है और रेलवे के तय रेट पर काम करना संभव नहीं है तो फिर क्या होगा? इस पर रेलवे से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि हर टेंडर में एक्जिट क्लॉज होता है। यदि किसी ठेकेदार को लगता है कि टेंडर की कीमत पर काम करने में घाटा हो रहा है तो वह टेंडर से एक्जिट कर सकता है। यदि ठेकेदार को महंगा पड़ रहा है तो कोई जबरदस्ती नहीं है कि आप पुराने रेट पर ही काम करें। वह कभी भी रेलवे को 'नमस्ते' कर सकते हैं।
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