खेती पर अल नीनो का होगा असर? किसानों को मौसम की मार से बचाने के लिए केंद्र सरकार है तैयार
Updated on
29-05-2026 02:12 PM
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया संकट और अल नीनो प्रभाव के चलते खेती-बाड़ी को झटका लग सकने और महंगाई बढ़ने के जोखिम को देखते हुए कृषि मंत्रालय किसानों को सपोर्ट देने की तैयारी में जुट गया है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कहा कि अभी मौसम विभाग का अंतिम अनुमान नहीं आया है, लेकिन अल नीनो से फसलों पर कोई बुरा असर न पड़े, इसको लेकर पूरी तैयारी की जा रही है।
चौहान ने यहां दो दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन के दौरान कहा, 'अल नीनो से घबरने की जरूरत नहीं है। मौसम विभाग से कोई अंतिम अनुमान नहीं आया है, फिलहाल केवल अटकलें हैं।' चौहान ने कहा, 'हालांकि हम यह देख रहे हैं कि जिन जिलों में ज्यादा प्रभाव पड़ सकता है, उनमें कौन सी वैकल्पिक फसलें हो सकती हैं। उन फसलों के मुताबिक बीजों की व्यवस्था की जाएगी। अगर तापमान ज्यादा बढ़ता है और बीच में बारिश में लंबा गैप आता है, तो इसको लेकर आपात योजना भी तैयार कर रहे हैं।'
मौसम विभाग का अनुमान
कृषि मंत्री ने कहा, 'जैसी परिस्थिति होगी और जिस राज्य को जैसी आवश्यकता होगी, उसी के अनुसार काम करेंगे।' खरीफ सीजन के लिए बुआई जून के दूसरे हफ्ते से शुरू होने लगती है। मौसम विभाग ने 13 अप्रैल को अपने पहले अनुमान में कहा था कि इस साल मॉनसूनी बारिश सामान्य से कम रह सकती है और यह लॉन्ग पीरियड ऐवरेज के 92% करीब रह सकती है।
क्या है अल नीनो?
अल नीनो स्पेनिश भाषा का शब्द है। इसका मतलब होता है छोटा बच्चा (Little Boy)। प्रशांत महासागर में पेरू के निकट समुद्री तट के गर्म होने की घटना को अल नीनो कहा जाता है। इस वजह से समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 4-5 डिग्री ज्यादा हो जाता है। इस गर्मी से समुद्र में चल रही हवाओं के रास्ते और रफ्तार में बदलाव आता है और मौसम चक्र बुरी तरह से प्रभावित होता है।
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