यह पूरी तरह से जन-विरोधी फैसला है। हर दिन लाखों ऐसे ट्रांज़ैक्शन होते हैं और फीस लगाने का फैसला एकतरफा था।
पैनल की बैठक के दौरान, RSP के विपक्षी सांसद NK प्रेमाचंद्रन ने कहा कि UPI पर चार्ज लगाने के सरकार के फैसले पर चर्चा होनी चाहिए, जबकि कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने GDP कैलकुलेशन का मुद्दा उठाया। लेकिन पैनल के चेयरमैन ने कहा कि ये दोनों मुद्दे बैठक के एजेंडे का हिस्सा नहीं हैं।
UPI और इस बात को लेकर कि ट्रांज़ैक्शन चार्ज लगाए जाने वाले हैं, पूरे देश में चिंता और आक्रोश है। इसलिए जाहिर है, जो बात देश के लोगों को परेशान करती है, वह संसदीय कमेटी की कार्यवाही में भी झलकती है और उठाई जाती है।
चिदंबरम भी पैनल के सदस्य थे
- इसी साल मार्च में आई अपनी रिपोर्ट में संसदीय पैनल ने कहा था कि 'UPI इकोसिस्टम की फाइनेंशियल सस्टेनेबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए एक व्यावहारिक रेवेन्यू मैकेनिज्म बनाना जरूरी है, ताकि सरकारी खजाने पर लगातार बोझ न पड़े।'
- पैनल में मनीष तिवारी, प्रेमाचंद्रन और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम भी सदस्य थे। उसी रिपोर्ट में पैनल ने यह भी सुझाव दिया था कि सरकार एक टियर वाला, आत्मनिर्भर रेवेन्यू मॉडल विकसित करे।