जांच में दुकान से स्कूल टैग लगी यूनिफॉर्म और किताबें मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई। बता दें कि जिले में ऐसे दर्जनों स्कूल हैं, जहां प्रबंधन इस तरह से अभिभावकों से मनमानी फीस वसूली के साथ ही यूनिफार्म और किताबें खरीदने के लिए दबाव बनाते हैं।
इस स्कूल के अभिभावकों ने शिकायत की थी कि प्रबंधन उन्हें एक तय दुकान से ही यूनिफॉर्म और किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहा है। यह मामला कलेक्टर संजय अग्रवाल तक पहुंचा, तब उन्होंने तत्काल जांच के निर्देश दिए।
कलेक्टर के निर्देश पर छापेमारी
जिसके बाद डीईओ विजय कुमार टांडे ने टीम गठित कर स्कूल में दबिश दी। जांच टीम में डीईओ विजय कुमार टांडे, प्राचार्य चंद्रभान सिंह ठाकुर और समग्र शिक्षा के एपीसी रोहित भांगे शामिल थे। टीम ने स्कूल के सामने संचालित साई इंटरप्राइजेज की जांच की, जहां स्कूल की आधिकारिक टैग लगी यूनिफॉर्म और किताबें मिलीं। शिकायत सही पाए जाने पर दुकान को सील कर दिया गया है।
स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अधिकारियों का कहना है कि शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी निजी स्कूल द्वारा अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताब या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। नियम उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।
स्कूल से जुड़ा दुकान का नेटवर्क
इस कार्रवाई के दौरान दुकान संचालक को बुलाने पर उसने दावा किया कि दुकान पहले ही स्कूल से जुड़ी दिव्या मैडम को बेच दी गई है। दस्तावेजों की जांच में यह तथ्य सही पाया गया। इसके बाद जांच टीम को आशंका हुई कि ज्यादा मुनाफे के उद्देश्य से स्कूल प्रबंधन ने परोक्ष रूप से दुकान संचालन शुरू कराया था। अब टीम आर्थिक लेन-देन और पूरे नेटवर्क की विस्तृत जांच कर रही है।
प्रिंसिपल ने कहा- दुकान से कोई वास्ता नहीं
सेंट जेवियर स्कूल के प्राचार्य जितेंद्र हुंडल ने इस कार्रवाई के बाद प्रबंधन की तरफ से सफाई दी है। उन्होंने कहा कि, जहां कार्रवाई हुई वह दुकान स्कूल के दायरे के बाहर स्थित है। उसके आसपास और 5-7 दुकानें है। इनमें से किसी भी दुकान का संचालन स्कूल प्रबंधन नहीं करता। वहां क्या-क्या बिक रहा, हमें नहीं पता है।
DEO बोले- स्कूल की मान्यता हो सकती है रद्द
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) विजय टांडे ने कहा कि निजी स्कूलों में किताब-कॉपी या यूनिफॉर्म के लिए अभिभावकों को विवश नहीं किया जा सकता। शासन के आदेश का उल्लंघन करने वाले संस्थानों की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। इस मामले की जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी किया गया है।
जिले में 562 प्राइवेट स्कूल, मनमानी रोकने बली निगरानी समिति
जिले में 562 निजी स्कूल संचाललित है। इनकी मनमानी रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने जिला स्तर पर कलेक्टर और डीईओ की निगरानी समिति बनाई है। निजी स्कूल पालकों को किसी विशेष दुकान से किताब, स्टेशनरी या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। नियम उल्लंघन पर जुर्माना और गड़बड़ी मिलने पर मान्यता रद्द हो सकती है।
इसी तरह यूनिफॉर्म कम से कम 3 साल तक नहीं बदली जा सकेगी। लेकिन, निगरानी समिति स्कूल प्रबंधन की मनमानी को नजरअंदाज करती रही है। हालांकि, यह पहला मौका है, जब दुकान सील करने की कार्रवाई गई है। वहीं, शासन के निर्देशानुसार कक्षा 1 से 8 तक केवल एनसीईआरटी एसीईआरटी किताबें मान्य हैं। फीस वृद्धि सालाना 8% से ज्यादा नहीं होगी।