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ट्रेन में RAC पर यात्रा कर रहे दो यात्रियों को मिला एक बेडरोल, पहुंचा कोर्ट, मिला 25000 का हर्जाना

Updated on 31-07-2026 01:20 PM
नई दिल्ली: भारतीय रेल (Indian Railways) की ट्रेन में आप अक्सर यात्रा करते होंगे। उसमें आप ऐसी ढेरों चीजें नोट करते होंगे जो कि किसी 'ग्राहक के अधिकार' के विपरीत है। लेकिन उसकी शिकायत नहीं की जाती। प्रयागराज से दिल्ली आने वाले एक यात्री के साथ ही ऐसा हुआ और उन्होंने कंज्यूमर कोर्ट (Delhi Consumer Disputes Redressal Commission) का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने रेलवे के ऊपर 25,000 रुपये का जुर्माना लगा दिया।

क्या है वाकया

हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) ने इस बारे में एक रिपोर्ट छापी है। इसके मुताबिक कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत करने वाले व्यक्ति ने 25 अक्टूबर, 2022 को प्रयागराज से दिल्ली के लिए टिकट बुक की थी। यात्रा की तारीख 28 अक्टूबर, 2022 की थी। उनका टिकट कंफर्म नहीं हुआ बल्कि RAC में रह गया। उसके बर्थ पर दो लोग थे और उन दोनों के लिए रेलवे की तरफ से सिर्फ एक कंबल, एक तकिया और दो चादरें ही दी गईं। कोई हैंड टॉवेल भी नहीं दिया गया। उन्होंने अटेंडेंट से एक और कंबल और तकिया मांगा तो अटेंडेंट ने जवाब दिया, “एक सीट के लिए सिर्फ एक कंबल, एक तकिया और 2 चादरें ही देने का नियम है।”

ट्विटर पर शिकायत

उस यात्री ने इस बारे में ट्विटर पर ट्वीट किया। इसके बाद रेलवे की तरफ से उन्हें PNR साझा करने का संदेश मिला। जब उसने सभी विवरण साझा किए, तो अटेंडेंट ने एक हैंड टॉवेल दे दिया। उन्हें कोई अतिरिक्त कंबल, चादर या तकिया (Bed Roll) नहीं दिया गया। इसके बाद ट्विटर पर इलाहाबाद के डीआरएम की तरफ से संदेश आया कि उनकी शिकायत दूर कर दी गई। उन्होंने ट्रेन में चल रहे टीटीई (TTE) से भी बात की लेकिन निदान नहीं निकला। उन्होंने टीटीई से कंप्लेन बुक मांगा लेकिन नहीं दिया गया। फिर उन्होंने दिल्ली आ कर लिखित कंप्लेन दर्ज कराया।

कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

इसके बाद उन्होंने (Delhi Consumer Disputes Redressal Commission) या उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। वहां उत्तर रेलवे ने कहा कि यह मामला नार्थ सेंट्रल रेलवे, इलाहाबाद का है। रेलवे की तरफ से बताया गया कि यात्री को रेलवे नियम के अनुसार बेडरोल दिए जाते हैं। यात्रा के दौरान मांग/जरूरत और बेडरोल की उपलब्धता के अनुसार अतिरिक्त कंबल दिया जाता है। उन्होंने बताया कि रेलवे यात्रियों को बेडरोल प्रदान करने के लिए एक कॉन्ट्रैक्ट देता है।

कोर्ट ने लगाया जुर्माना

कंज्यूमर कोर्ट की प्रेसिडेंट मोनिका अग्रवाल श्रीवास्तव और सदस्य राजेंद्र धर और रितू गरोडिया ने पाया कि यह रेलवे की विफलता है। उन्होंने बीते 10 जुलाई को दिए आदेश में कहा कि रेलवे बोर्ड से 23.09.2009 को जारी एक सर्कुलर में बताया गया है कि आरएसी पैसेंजर्स को भी अलग बेडरोल मिलेगा। एक बेडरोल में एक कंबल, एक तकिया, तकिये का एक कवर, दो चादरें और एक हैंड टॉवेल होता है। इस यात्री को सर्कुलर का उल्लंघन करते हुए किसी अनजान व्यक्ति के साथ कंबल शेयर करने को कहा गया। इसके बाद, रेलवे ने बेडरोल बांटने ठेकेदार पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया, लेकिन शिकायतकर्ता को इसके बारे में सूचित करने में असफल रहा या यात्री को मुआवजा नहीं दिया। आदेश में आगे कहा गया, "इसके अलावा, प्रतिवादी ने यह साबित करने के लिए कोई प्रमाण नहीं रखा कि शिकायतकर्ता को अलग बेडरोल दिया गया। इसलिए, प्रतिवादी सेवा में कमी के लिए दोषी पाया गया। कोर्ट ने रेलवे को मानसिक उत्पीड़न और शारीरिक असुविधाओं के लिए 20,000 रुपये का हर्जाना भरने का निर्देश दिया। साथ ही 5,000 रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया।

60 दिन में मिलेगा हर्जाना

कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि पीड़ित यात्री को रेलवे की तरफ से फैसले के 60 दिनों के अंदर हर्जाना दिया जाए। यदि रेलवे ऐसा करने में विफल रहता है तो उसे सात फीसदी सालाना के हिसाब से ब्याज भी भरना होगा।

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