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अब समय आ गया है कि 'धरती के नीचे की हरित क्रांति' हो, अनिल अग्रवाल का संदेश समझिए

Updated on 27-05-2026 01:05 PM
नई दिल्ली: दुनिया भर में इस समय कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें घट रही हैं। मानक ब्रेंट क्रूड की प्रति बैरल कीमत 100 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे है। लेकिन भारत में इन दिनों पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतें बढ़ रही हैं। ऐसे में वेदांता ग्रुप ( Vedanta Group ) के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने प्राकृतिक संसाधनों में आत्मनिर्भर बनने के लिए एंट्रपेन्योरशिप, प्राइवेटाइजेशन , एक्सप्लोरेशन और भरोसे पर आधारित शासन व्यवस्था (Trust-based governance) को बढ़ावा देने का संदेश दिया है।

राष्ट्रीय मिशन की आवश्यकता

सोशल मीडिया के जरिए अक्सर संदेश देने वाले अनिल अग्रवाल का कहना है कि धरती के नीचे ढेरों संसाधन छुपे हुए हैं। इसकी खोज करने और क्षमता के उपयोग के लिए उन्होंने एक राष्ट्रीय मिशन की आवश्यकता पर जोर दिया। एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत के पास मजबूत भू-वैज्ञानिक क्षमता, उद्यमशील प्रतिभा और उन्नत तकनीक मौजूद है, जो देश को बड़े पैमाने पर प्राकृतिक संसाधनों में आत्मनिर्भर बना सकती है।

हरित क्रांति से सीखें

कभी भारत में खाने के लिए पर्याप्त अनाज नहीं उगते थे। लेकिन सरकार ने 'हरित क्रांति' के जरिए इसमें आत्मनिर्भरता प्राप्त की। इसी हरित क्रांति का उदाहरण देते हुए अनिल अग्रवाल ने कहा कि अब देश को खनिजों, धातुओं, तेल और गैस के क्षेत्र में भी इसी तरह का एक बड़ा अभियान शुरू करना चाहिए। इससे आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी। साथ ही बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने इसे “धरती के नीचे की हरित क्रांति” बताते हुए कहा कि भारत के कुल आयात का लगभग 50% हिस्सा धरती के नीचे मौजूद संसाधनों से जुड़ा है, जबकि देश के पास दुनिया के सबसे समृद्ध भू-वैज्ञानिक भंडारों में से एक है। उन्होंने यह भी कहा कि नीतिगत समर्थन, सरकारी एजेंसियों से तेज मंजूरियां, एक्सप्लोरेशन पर आधारित विकास और उद्यमियों पर अधिक भरोसा तेल एवं गैस, तांबा, एल्युमिनियम, सोना, जस्ता, निकेल और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन को काफी बढ़ा सकते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत ऊर्जा अधिशेष और विनिर्माण-आधारित वैश्विक शक्ति बनने की क्षमता रखता है।

देश में हो निवेश

भारतीयों के विदेशी धरती पर होने वाले निवेश पर भी उन्होंने कुछ संदेश दिया है। उन्होंने कहा है “भारत को अपनी मेहनत की कमाई दूसरे देशों में नौकरियां पैदा करने के लिए नहीं भेजनी चाहिए।” अनिल अग्रवाल ने हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (HZL) और बाल्को (BALCO) के बदलाव का उदाहरण देते हुए कहा कि उद्यमिता, तकनीक और संचालन की स्वतंत्रता ने बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ाने, रोजगार सृजन करने और डाउनस्ट्रीम औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि भारत का जस्ता उत्पादन लगभग 1.4 लाख टन से बढ़कर करीब 30 लाख टन तक पहुंच गया, जबकि बाल्को में एल्युमिनियम उत्पादन 1 लाख टन से बढ़कर अब 60 लाख टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

उद्यमियों पर भरोसा कीजिए

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अनिल अग्रवाल ने कहा, "आज अगर भारत 100 रुपये कमाता है, तो उसमें से लगभग 50 रुपये संसाधनों के आयात पर विदेश चले जाते हैं। उद्यमियों पर भरोसा कीजिए... जब भी सरकार ने उद्यमियों पर भरोसा किया है, उन्होंने विश्वस्तरीय परिणाम दिए हैं। भारत को सबसे ज्यादा जरूरत है- खोज, खोज और खोज की। हमारे पास भू-वैज्ञानिक क्षमता, युवा शक्ति, तकनीक और वह सामर्थ्य है, जिससे भारत ऊर्जा अधिशेष और विनिर्माण आधारित राष्ट्र बन सकता है।"

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