भोपाल। शाहजहांनाबाद क्षेत्र में पांच वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या करने वाले अतुल निहाले को सुनाई गई फांसी की सजा फिलहाल टल गई है। मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय ने सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। अब इस मामले में दोषसिद्धि और सजा के बिंदुओं पर न्यायालय सुनवाई करेगा।
इस जघन्य मामले में भोपाल के विशेष पॉक्सो न्यायालय ने 18 मार्च 2025 को दोषी अतुल निहाले को तीन अलग-अलग धाराओं में तीन बार मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद प्रदेश में यह पहला मामला था, जिसमें किसी आरोपित को अलग-अलग धाराओं में तीन बार मृत्युदंड दिया गया था। इसके अतिरिक्त दोषी को अन्य धाराओं में आजीवन कारावास और सात-सात वर्ष के कारावास की सजा भी सुनाई गई थी।
उच्च न्यायालय जबलपुर ने भी इस समाज को बरकरार रखा था। इसके खिलाफ दोषी ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी। उसकी याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की तीन सदस्यीय पीठ ने सजा पर रोक लगाने का आदेश दिया। न्यायालय अब मामले में दोष सिद्धि और सजा से जुड़े पहलुओं पर विस्तार से सुनवाई करेगा।
24 सितंबर 2024 को शहाजहांनाबाद क्षेत्र के ईदगाह हिल्स स्थित वाजपेयी मल्टी में हुए इस अपराध की नृशंसता से राजधानी हिल गई थी। अपराधी ने पांच साल की मासूम बच्ची से ज्यादती के बाद गला घोंटकर हत्या की थी। बच्ची के शव को अपने फ्लैट की टंकी में छिपा दिया। उसकी तलाश में पुलिस ने पूरा इलाका छान मारा।
पड़ोसियों से दुर्गंध की शिकायत पर पुलिस तीसरे दिन उस फ्लैट में पहुंची थी। वहां से अतुल निहाले और उसकी मां बसंती व बहन चंचल को हिरासत में लिया था। पूछताछ में पता चला कि शव को छिपाने में उसकी मां-बहन ने भी मदद की थी। न्यायालय ने दोनों को अपराधी की मदद करने के दोष में सजा सुनाई।