नई थम रही रुपये की गिरावट, डॉलर के मुकाबले फिर पहुंचा ऑल टाइम लो पर
Updated on
14-05-2026 04:54 PM
नई दिल्ली: भारतीय रुपये में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रुपया आज शुरुआती कारोबार में 20 पैसे टूटकर अब तक के सबसे निचले स्तर 95.86 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और पश्चिम एशिया संकट को लेकर चिंताओं से रुपये पर भारी दबाव है। रुपया इस साल एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गया है और इसमें अब तक छह प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है। महंगा कच्चा तेल, मजबूत अमेरिकी डॉलर और पश्चिम एशिया संकट को लेकर बढ़ती चिंताएं इसकी मुख्य वजह हैं।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.74 प्रति डॉलर पर खुला। फिर टूटकर 95.86 प्रति डॉलर पर पहुंच गया जो पिछले बंद भाव से 20 पैसे की गिरावट दर्शाता है। रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 95.80 पर पहुंचने के बाद 95.66 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। रुपये की गिरावट को थामने के लिए आरबीआई अब तक अरबों डॉलर झोंक चुका है। जानकारों का कहना है कि अगर केंद्रीय बैंक ऐसा नहीं करता तो रुपये की हालत और बदतर होती।
क्यों आ रही है गिरावट?
इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.04 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.48 पर रहा। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 0.44 प्रतिशत की बढ़त के साथ 106.10 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बुधवार को शुद्ध बिकवाल रहे थे और उन्होंने 4,703.15 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
डॉलर के मुकाबले रुपये में इस हफ्ते 1.4% गिरावट आई है। पिछले तीन दिन इसने हर सेशन में ऑल टाइम लो छुआ है। भारत का करीब 90 फीसदी कच्चा तेल और 50 फीसदी गैस बाहर से आती है। लेकिन ईरान युद्ध के बाद कच्चे तेल की कीमत में 50 फीसदी तेजी आई है। इससे भारत का आयात बिल बढ़ने की आशंका है। इसे देश का ट्रेड डेफिसिट बढ़ सकता है।
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