T-14 टैंकों को बेड़े में शामिल करने से क्यों झझकती है भारतीय सेना?
- भारतीय सेना असल में साल 2015 से ही T-14 का मूल्यांकन कर रही है। भारतीय सैन्य अधिकारियों के मन में इस टैंक को लेकर कई तरह के झिझक हैं।
- खुद रूसी सेना ने यूक्रेन युद्ध में T-14 के बजाय अपने पुराने T-80 और T-90 टैंकों पर ज्यादा भरोसा जताया है। T-14 अभी भी बड़े पैमाने पर उत्पादन में नहीं आया है।
- रूस ने जुलाई 2023 में कुछ T-14 टैंकों को युद्धक्षेत्र में उतारा था लेकिन जल्द ही इन्हें फ्रंटलाइन से वापस हटा लिया गया। इन्हें मुख्य रूप से सुरक्षित दूरी से अप्रत्यक्ष गोलाबारी के लिए इस्तेमाल किया गया था न कि आमने-सामने के सीधे हमलों में।
- इसके अलावा रोस्टेक के सीईओ सर्गेई चेमेजोव के मुताबिक T-14 टैंक अत्यधिक महंगे हैं और रूसी सेना इस आधुनिक टैंक के बजाय युद्ध में ज्यादा किफायती T-90 टैंकों का उपयोग करना पसंद करती है।
- भारतीय सेना को 1700 से ज्यादा मुख्य युद्धक टैंकों की जरूरत है। यदि T-14 का भारत में निर्माण होता भी है तो प्रति यूनिट इसकी कीमत काफी ज्यादा रहेगी।