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प्राइवेट ट्रस्ट अब नहीं दे पाएंगे भारी-भरकम इंटरेस्ट, सरकार ने कसी नकेल

Updated on 08-05-2026 12:01 PM
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने उन कंपनियों के लिए नियमों में बड़ा बदलाव किया है जो अपना PF योगदान खुद के ट्रस्ट के जरिए संभालती हैं। अब इन कंपनियों के लिए हर साल होने वाले अनिवार्य ऑडिट की जगह रिस्क-आधारित सिस्टम लागू किया जाएगा। साथ ही, ये ट्रस्ट अपने कर्मचारियों को EPFO की दर से 2% से ज्यादा ब्याज नहीं दे सकेंगे। नए नियमों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कंपनी बिकने या मर्जर होने पर भी उनका पीएफ ट्रस्ट का स्टेटस खत्म नहीं होगा। EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज ने हाल ही में इन नियमों को मंजूरी दी है।

नए सिस्टम के तहत, ये प्राइवेट ट्रस्ट EPFO द्वारा घोषित सालाना ब्याज दर से 2 प्रतिशत से ज्यादा अतिरिक्त ब्याज नहीं दे पाएंगे। अधिकारी ने बताया, यह फैसला पैसों की समझदारी बनाए रखने और बहुत ज्यादा रिटर्न देने से रोकने के लिए लिया गया है। दरअसल, यह देखा गया था कि कुछ ट्रस्ट तब 34% जैसा भारी-भरकम ब्याज देने लगते थे जब उनके सदस्यों की संख्या बहुत कम रह जाती थी।

ऑडिट में छूट

ऑडिट के मामले में अब EPFO केवल उन्हीं कंपनियों या ट्रस्ट की जांच करेगा जिनमें जोखिम ज्यादा होगा। या जो नियमों का पालन नहीं कर रहे होंगे। जो कंपनियां नियम मान रही हैं, उनका हर साल ऑडिट करना जरूरी नहीं होगा। नए नियमों के मुताबिक, अगर कोई कंपनी किसी दूसरी कंपनी के साथ जुड़ती है या उसे खरीदती है (M&A), तो भी उसका EPFO के तहत 'छूट प्राप्त' दर्जा बरकरार रह सकेगा।

एक सीनियर अधिकारी ने ET को बताया कि भारत में करीब 1,000 से 1,200 बड़ी कंपनियां, PSUs और प्राइवेट संस्थान हैं जिन्हें EPFO से छूट मिली हुई है। ये कंपनियां EPF ऐक्ट 1952 की धारा 17 के तहत अपना PF ट्रस्ट खुद चलाती हैं। हालांकि, शर्त यह होती है कि उन्हें अपने कर्मचारियों को EPFO की स्कीम के बराबर या उससे बेहतर फायदे देने होते हैं।

प्राइवेट पीएफ ट्रस्ट को छूट

  • करीब 1,000 से 1,200 बड़ी कंपनियों को EPFO से छूट मिली हुई है
  • ये कंपनियां EPF ऐक्ट 1952 के तहत अपना PF ट्रस्ट खुद चलाती हैं
  • उन्हें अपने मेंबर्स को EPFO के बराबर या उससे बेहतर फायदे देने होते हैं
  • ये ट्रस्ट अपने मेंबर्स को EPFO की दर से 2% से ज्यादा ब्याज नहीं दे सकेंगे
  • कुछ ट्रस्ट मेंबर्स की संख्या घटने पर 34% तक भारी-भरकम ब्याज देते हैं

क्या होगा फायदा?

कोई भी कंपनी अपनी मर्जी से या कोर्ट के आदेश पर ही इस छूट (एग्जेंप्शन) को खत्म कर सकती है। अगर कोई कंपनी अपना ट्रस्ट बंद करती है या छूट छोड़ती है, तो उसे अखबारों में पब्लिक नोटिस देना होगा। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि कर्मचारियों का हक सुरक्षित रहे। साथ ही, बंद होने के वक्त उन सभी खातों को (जिनकी केवाईसी नहीं हुई है या जो बंद पड़े हैं) EPFO को ट्रांसफर करना होगा, ताकि पैसों का गलत इस्तेमाल न हो सके। इन बदलावों का मकसद सरकारी निगरानी को मजबूत करना, बिजनेस करने को आसान बनाना और कर्मचारियों की सहूलियत बढ़ाना है।

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