रूस की परमाणु युद्ध में महाविनाश से बचने की तैयारी? रहस्यमय पहाड़ के नीचे बन रहा पुतिन का 'न्यूक्लियर हाइडआउट'?
Updated on
27-09-2026 11:32 AM
मॉस्को: दुनिया भर में बढ़ते कूटनीतिक तनाव और तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं के बीच एक खौफनाक खुफिया रिपोर्ट ने पश्चिमी देशों की नींद उड़ा दी है। दावा किया जा रहा है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन किसी सुदूर और अज्ञात पहाड़ के नीचे एक विशालकाय 'डूम्सडे बंकर' यानि महाविनाश से बचने का गुप्त ठिकाना तैयार कर रहे हैं। सैटेलाइट इमेजरी और खुफिया सूत्रों के मुताबिक यह सिर्फ एक सुरक्षित अंडरग्राउंड बेस नहीं है बल्कि इसे रूस के सबसे खतरनाक और स्वचालित परमाणु हथियार प्रणाली 'डेड हैंड' (Dead Hand) का नया कंट्रोल रूम माना जा रहा है।
यह एक ऐसा खौफनाक सिस्टम है जो किसी बड़े हमले में रूस के शीर्ष नेतृत्व के खत्म हो जाने के बाद भी बिना किसी इंसानी आदेश के खुद-ब-खुद परमाणु मिसाइलें दाग सकता है। यानि अगर मॉस्को परमाणु हमला किया जाता है तो रूसी परमाणु बम खुद पर खुद परमाणु बम दागने वाले उस देश पर गिर जाएगा। यानि खत्म होकर भी रूस अपने दुश्मन को बख्शेगा नहीं बल्कि उसे भी तबाह कर देगा।
पुतिन के सीक्रेट 'डूम्सडे बंकर' में आखिर क्या पक रहा है?
दावा किया गया है कि रूस पहाड़ के नीचे छिपाकर एक बंकर तैयार कर रहा है। मशीन गन बुर्ज से सुरक्षित यह जमीन के नीचे बना कमांड सेंटर रूस की सबसे गुप्त जगहों में से एक है। परमाणु युद्ध छिड़ने की स्थिति में पुतिन यहां छिप सकते हैं और आगे की रणनीति पर काम कर सकते हैं।
दावे के मुताबिक 24 कमरों वाली यह सुरंग पश्चिमी देशों के खिलाफ जवाबी परमाणु हमले की गारंटी देने वाली रणनीति का मुख्य हिस्सा है।
यूराल इलाके में कोस्विनस्की कामेन पहाड़ के नीचे मिले इस बंकर में केमिकल, बायोलॉजिकल और रेडियोएक्टिव असर को रोकने के लिए एयर फिल्ट्रेशन यूनिट्स लगाई गई हैं।
'फैसिलिटी 1335' नाम का यह गुप्त ठिकाना सबसे पहले कोल्ड वॉर के दौरान बनाया गया था ताकि न्यूक्लियर हमले की स्थिति में पश्चिम के साथ आपसी तबाही सुनिश्चित की जा सके।
क्या है खौफनाक 'डेड हैंड' प्रोजेक्ट जिससे खौफ खाता है अमेरिका?
इसे 'डेड हैंड प्रोजेक्ट' नाम दिया गया था। इसके तहत अगर क्रेमलिन के आला अधिकारियों से संपर्क टूट जाता तो बैक-अप कंट्रोल चैनल एक्टिवेट हो जाते।
ये मिसाइल लॉन्चर को एक्टिवेट करने के लिए लॉन्ग-वेव रेडियो सिग्नल भेजेंगे। 'द संडे टाइम्स', डेनिश मीडिया ग्रुप 'डैनवॉच' और 'डोसियर सेंटर' की जांच से पता चला है कि इस साइट को फिर से बनाया गया है।
कोस्विनस्की कामेन की तलहटी में बनी इस नई और विशाल संरचना पर करोड़ों पाउंड का खर्च आ रहा है।
प्रोक्योरमेंट डेटा से पता चलता है कि 2018 से मॉस्को ने पहाड़ के अंदर भारी खुदाई और चट्टान में ड्रिलिंग करने वाले उपकरण, स्टील, पाइप और केबल पहुंचाए हैं।
जांच में यह भी पता चला है कि साइट पर खदान के वेंटिलेशन सिस्टम और एयर फिल्ट्रेशन यूनिट भी पहुंचाए गए हैं जो केमिकल, बायोलॉजिकल और रेडियोएक्टिव फॉलआउट को रोकने में सक्षम हैं। रिकॉर्ड बताते हैं कि ज्यादातर काम 2020 और 2021 के बीच किया गया था।
क्या रूस सच में परमाणु युद्ध की तैयारी कर रहा है?
इस साइट पर पहले ही 30 लाख लीटर ईंधन, 8,23,000 लीटर गैस और लगभग 20,000 टन स्टील का इस्तेमाल हो चुका है – यह वज़न लगभग तीन एफिल टावरों के बराबर है।
अनुमान है कि इस्तेमाल की गई कंक्रीट से कम से कम 1,50,000 वर्ग मीटर का सरफेस एरिया बनाया जा सकता है जो एक बहु-मंजिला इमारत के लिए काफी है।
रूस के एक सीनियर मिलिट्री अधिकारी ने कहा कि 'फैसिलिटी 1335' के जरिए 'स्ट्रेटेजिक मिसाइल फोर्स किसी भी दुश्मन के खिलाफ जवाबी कार्रवाई का अपना ऐतिहासिक मिशन पूरा करेंगी।'
ये चौंकाने वाली जानकारी तब सामने आई है जब पुतिन ने सार्वजनिक रूप से कहा कि अगर संघर्ष बढ़ता है तो वह यूक्रेन के खिलाफ टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार का इस्तेमाल करने के लिए तैयार रहेंगे।
इस प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करने के संकेत सबसे पहले 2020 में मिले थे जब क्रेमलिन ने पुतिन और उनके शीर्ष अधिकारियों के बीच हुई बैठक के ट्रांसक्रिप्ट जारी किए थे। बैठक के दौरान पुतिन ने एक ऐसे सिस्टम को बनाने पर चर्चा की जो यह सुनिश्चित करे कि हमले की स्थिति में भी रूस का न्यूक्लियर कमांड और कंट्रोल इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित रहे।
नॉर्वेजियन स्टाफ कॉलेज और आर्म्ड फोर्सेज में रूस की सुरक्षा नीति के एक्सपर्ट टॉम रोसेथ ने 'द संडे टाइम्स' की रिपोर्ट में कहा है 'ऐसा लगता है कि रूसी इस फैसिलिटी को हर तरह के हमले से सुरक्षित बना रहे हैं।' उन्होंने कहा 'इसलिए 1335 और न्यूक्लियर फोर्स की कमांड-एंड-कंट्रोल फैसिलिटी को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें और भी गहराई तक खुदाई करनी होगी और उस जगह को और भी मजबूत बनाना होगा।'
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