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जल्‍द आने वाले हैं 10 और 20 के प्‍लास्टिक नोट, जान लीजिए आपके पुराने नोटों का क्‍या होगा

Updated on 28-07-2026 02:37 PM
नई दिल्‍ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश के करेंसी सिस्‍टम को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने वाला है। जल्द ही बाजार में 10 रुपये और 20 रुपये के प्लास्टिक (पॉलीमर) नोट दिखाई देंगे। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद अब इनके आने का रास्‍ता साफ हो गया है। आरबीआई कुल 200 करोड़ पॉलीमर नोट छापकर ट्रायल शुरू करेगा। ड्यूरेबिलिटी, फर्जीवाड़े पर रोक और छपाई लागत में कमी लाने के मकसद से ऐसा किया जा रहा है। इस ट्रायल के बावजूद पुराने कागजी नोट भी बाजार में पूरी तरह से वैध और चलन में बने रहेंगे।

संसद के मानसून सत्र के दौरान वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में पुष्टि की कि सरकार ने 10 रुपये और 20 रुपये के 100-100 करोड़ यानी कुल 200 करोड़ पॉलीमर नोटों के ट्रायल को हरी झंडी दे दी है।

ग्लोबल टेंडर जारी

इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए आरबीआई की नोट-प्रिंटिंग यूनिट ने एडवांस्ड सिक्योरिटी फीचर्स से लैस पॉलीमर सबस्ट्रेट शीट की सप्लाई के लिए एक ग्लोबल टेंडर यानी 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' (EOI) जारी किया है।

इसके तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनियों से बोलियां मंगाई गई हैं। इसमें आवेदन करने की आखिरी तारीख 18 अगस्त है। टेंडर प्रक्रिया और कच्चे माल की सप्लाई पूरी होने के बाद इन नोटों की छपाई शुरू की जाएगी।

प्‍लास्टिक नोटों की खासियत

  • पॉलीमर बैंकनोट्स सामान्य कागज के बजाय खास तरह के प्लास्टिक मटीरियल (पॉलीमर सबस्ट्रेट) पर प्रिंट होते हैं।
  • ये नोट वजन में सामान्य नोटों की तरह ही हल्के होते हैं, लेकिन इनकी शेल्फ लाइफ कागजी नोटों से कई गुना अधिक होती है।
  • ये पानी में भीगने पर गलते नहीं हैं, धूल-गंदगी से खराब नहीं होते और आसानी से फटते भी नहीं हैं।
  • पॉलीमर नोटों के लंबे समय तक चलने से बार-बार नोट छापने का भारी-भरकम वित्तीय बोझ भी काफी हद तक कम हो जाएगा।
  • वित्त वर्ष 2024-25 में कागजी नोटों की छपाई पर आरबीआई ने 6,372.8 करोड़ रुपये खर्च किए थे।

नकल करना है मुश्किल

पेपर करेंसी की तुलना में पॉलीमर सबस्ट्रेट शीट पर एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स को शामिल करना बेहद आसान होता है। इस खास प्लास्टिक मटीरियल पर होलोग्राम और विशेष रंग बदलने वाली स्याही जैसी तकनीकों का सटीक इस्तेमाल किया जा सकता है
इन आधुनिक फीचर्स के कारण जालसाजों के लिए पॉलीमर नोटों की नकल बनाना या नकली नोट तैयार करना बहुत मुश्किल हो जाएगा। इससे देश की वित्तीय सुरक्षा प्रणाली को मजबूती मिलेगी।

चलन में रहेंगे कागज के नोट

रिजर्व बैंक और सरकार ने साफ किया है कि पॉलीमर नोटों के आने से मौजूदा 10 रुपये और 20 रुपये के कागजी नोटों की वैधता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह 'को-एग्जिस्टेंस' मॉडल पर काम करेगा। इसमें दोनों तरह के नोट बाजार में एक साथ इस्तेमाल किए जा सकेंगे।

नए प्लास्टिक नोटों की बाजार में एंट्री अचानक न होकर चरणबद्ध तरीके से होगी। जब तक नए नोट पूरी तरह से अर्थव्यवस्था में स्थापित नहीं हो जाते तब तक कागजी नोट सामान्य रूप से सर्कुलेशन में बने रहेंगे।

इन देशों में चलते हैं प्‍लास्टिक नोट

भारत में नोटों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए पॉलीमर करेंसी लाने की दिशा में पहला प्रयास साल 2012 में किया गया था। हालांकि, तकनीकी बाधाओं के कारण वह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी थी।

अब व्यापक मूल्यांकन और नफे-नुकसान का अध्ययन करने के बाद इस प्रोजेक्ट को दोबारा हवा दी गई है। ग्‍लोबल लेवल पर ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड समेत दुनिया के 60 से अधिक देशों में पहले से ही पॉलीमर बैंकनोट्स चलन में हैं।

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