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टारगेट पूरा नहीं करने वाले अफसर-कर्मचारियों को पहले हटाया जाएगा

Updated on 22-05-2026 05:42 PM
भोपाल, मध्यप्रदेश सरकार ने तबादला नीति-2026 जारी कर दी है। नई नीति में बड़ा बदलाव करते हुए सरकार ने तय लक्ष्य पूरे नहीं करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशासनिक आधार पर प्राथमिकता से हटाने का प्रावधान किया है। ऐसे कर्मचारी तीन साल की अवधि पूरी होने से पहले भी तबादले की सूची में शामिल किए जा सकेंगे।

सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने कैबिनेट की मंजूरी के बाद आदेश जारी कर 1 जून से 15 जून तक विभागों को तबादले की अनुमति दी है। महिलाओं और रिटायरमेंट में कम समय बचने वालों कर्मचारियों को राहत दी गई है।

तीन साल से पहले भी हो सकेगा तबादला

नई नीति के तहत प्रथम और द्वितीय श्रेणी के कार्यपालिक अधिकारियों को एक ही जिले में तीन वर्ष पूरे होने पर जिले से बाहर स्थानांतरित किया जा सकेगा। वहीं तृतीय श्रेणी कर्मचारियों का भी एक स्थान पर तीन वर्ष या उससे अधिक समय पूरा होने पर तबादला किया जा सकेगा।

हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि तीन वर्ष की अवधि तबादले की अनिवार्य शर्त नहीं होगी। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी पिछले वित्तीय वर्ष के निर्धारित लक्ष्य पूरे नहीं कर पाया है तो उसका तबादला तय अवधि से पहले भी किया जा सकेगा। प्रशासनिक आधार पर ऐसे मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी।

रिक्त पदों के लिए श्रृखलाबंद तबादलों पर रोक

सरकार ने विभागों को यह भी निर्देश दिए हैं कि निर्माण और नियामक प्रकृति वाले विभागों को छोड़कर केवल तीन वर्ष की अवधि को तबादले का आधार न बनाया जाए। न्यायालय के आदेश, गंभीर शिकायत, रिक्त पदों की पूर्ति, पदोन्नति और प्रतिनियुक्ति से वापसी जैसे मामलों में भी तय प्रक्रिया के तहत तबादले किए जा सकेंगे। हालांकि रिक्त पदों की पूर्ति के लिए श्रृंखलाबद्ध तबादलों पर रोक रहेगी।

महिलाओं को गृह जिले में पदस्थ करने का प्रावधान

नई नीति में महिला कर्मचारियों और सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों को राहत दी गई है। अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को गृह जिले में पदस्थ करने का प्रावधान रखा गया है। वहीं जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम समय बचा है, उनका सामान्य परिस्थितियों में तबादला नहीं किया जाएगा।

पति-पत्नी को एक स्थान पर पदस्थ करने के भी आवेदन

पति-पत्नी को एक स्थान पर पदस्थ करने के लिए आवेदन स्वीकार किए जाएंगे, लेकिन अंतिम निर्णय प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार होगा। स्वयं के खर्च पर या परस्पर स्थानांतरण के आवेदन ऑनलाइन अथवा कार्यालय प्रमुख के सत्यापन के बाद स्वीकार किए जाएंगे।

गंभीर बीमारी से पीड़ित कर्मचारियों को राहत

गंभीर बीमारियों से पीड़ित कर्मचारियों को भी राहत दी गई है। कैंसर, डायलिसिस और ओपन हार्ट सर्जरी जैसे मामलों में जिला मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा पर स्थानांतरण किया जा सकेगा। वहीं 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांग कर्मचारियों का सामान्यतः तबादला नहीं किया जाएगा, हालांकि उनकी इच्छा पर स्थानांतरण संभव रहेगा।

कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों को राहत

मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को दो कार्यकाल यानी चार वर्ष तक तबादले से छूट मिलेगी। वहीं वित्तीय अनियमितता, गबन या सरकारी धन के दुरुपयोग के मामलों में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों को तत्काल संबंधित पदों से हटाने का प्रावधान भी रखा गया है।

सभी ट्रांसफर आदेश ऑनलाइन जारी होंगे

सभी स्थानांतरण आदेश ऑनलाइन जारी किए जाएंगे। 15 जून के बाद ई-ऑफिस से जारी आदेश शून्य माने जाएंगे और उनका पालन नहीं होगा। आदेशों में ट्रेजरी में उपयोग होने वाला एम्पलाई कोड दर्ज करना अनिवार्य रहेगा।

जांच वाले अधिकारियों को कार्यपालिक पद नहीं

नई नीति में यह भी कहा गया है कि जिन अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ नैतिक पतन से जुड़े आपराधिक मामले लंबित हैं, उन्हें कार्यपालिक पदों पर पदस्थ नहीं किया जाएगा। जिन कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच लंबित है, उनकी भी कार्यपालिक पदों पर पोस्टिंग नहीं होगी।

सभी स्थानांतरण आदेश ऑनलाइन अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव और विभागाध्यक्ष कार्यालयों से जारी किए जाएंगे। 15 जून के बाद ई-ऑफिस से जारी आदेश निर्धारित अवधि के बाहर मानकर शून्य माने जाएंगे और उनका पालन नहीं किया जाएगा।

स्थानांतरण आदेशों में ट्रेजरी में उपयोग होने वाला एम्पलाई कोड दर्ज करना अनिवार्य होगा। कर्मचारी का स्थानांतरण होने के बाद उसके पुराने पदस्थापना स्थल से वेतन आहरण बंद किया जाएगा। यदि इसके बाद वेतन निकाला जाता है तो इसे वित्तीय अनियमितता माना जाएगा। स्थानांतरित कर्मचारियों का अवकाश नई पदस्थापना पर जॉइन करने के बाद ही स्वीकृत होगा।

अभ्यावेदन और संवर्ग के लिए अलग व्यवस्था

कलेक्टर, विभागीय अधिकारी, वन संरक्षक और पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी तबादला आदेशों के खिलाफ अभ्यावेदन का निराकरण विभागाध्यक्ष संबंधित मंत्री की मंजूरी से करेंगे। प्रथम श्रेणी अधिकारियों के मामलों में मुख्य सचिव मुख्यमंत्री की मंजूरी से फैसला करेंगे। अन्य श्रेणी के मामलों का निराकरण विभागीय मंत्री की मंजूरी से किया जाएगा।

जिला संवर्ग कर्मचारियों और राज्य संवर्ग के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के जिले के भीतर तबादले कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री की मंजूरी के बाद किए जाएंगे। प्रथम श्रेणी अधिकारियों के तबादला आदेश मुख्यमंत्री की मंजूरी से जारी होंगे।

पुलिस विभाग में अलग व्यवस्था

उप पुलिस अधीक्षक से नीचे के अधिकारियों और कर्मचारियों की पदस्थापना का निर्णय पुलिस स्थापना बोर्ड करेगा। जिले के भीतर पदस्थापना पुलिस अधीक्षक प्रभारी मंत्री की मंजूरी के बाद करेंगे। उप पुलिस अधीक्षक और उससे वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद किए जाएंगे।


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