मुंबई बेहाल, रिफंड में चेन्नई का सबसे बुरा हाल, मकान मालिकों के पास फंसे किराएदारों के 1.3 लाख करोड़
Updated on
17-07-2026 01:18 PM
नई दिल्ली: अगर आप कोई मकान किराए पर लेते हैं तो मकान मालिक को सिक्योरिटी डिपॉजिट देना पड़ता है। यह रकम दो या तीन महीने के किराए के बराबर होती है। कई बार तो मकान छोड़ते समय यह राशि वापस भी नहीं मिलती है। मकान मालिक कई तरह के बहाने बनाकर यह रकम ऐंठ लेता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के छह प्रमुख शहरों में किराएदारों के करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये मकान मालिकों के पास सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में फंसे हुए हैं।नोब्रोकर रेंट रिपोर्ट 2026 के मुताबिक देश के छह सबसे बड़े मेट्रो शहरों मुंबई, दिल्ली, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई और बेंगलुरु में किराएदारों के 1.3 लाख करोड़ रुपये मकान मालिकों के पास सिक्योरिटी डिपॉजिट के तौर पर फंसे हुए हैं। इन शहरों में कराए गए एक सर्वे के मुताबिक देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में यह राशि 41,156 करोड़ रुपये और बेंगलुरु में 31,628 करोड़ रुपये है। कुल सिक्योरिटी डिपॉजिट में इन दोनों शहरों की हिस्सेदारी 58 फीसदी है।
रिफंड में चेन्नई सबसे खराब
रिपोर्ट के मुताबिक रिफंड के मामले में तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई का रेकॉर्ड सबसे खराब है। वहां 11 फीसदी किराएदारों का कहना है कि उन्हें कभी सिक्योरिटी डिपॉजिट का रिफंड नहीं मिला। केवल 44% लोगों का कहना है कि उन्हें पूरा रिफंड मिला है। इस मामले में दिल्ली का रेकॉर्ड बहुत अच्छा है। राजधानी में 24,054 करोड़ रुपये सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में जमा हैं। शहर में 58% किराएदारों का कहना है कि उन्हें पूरा रिफंड मिला है।
बेंगलुरु का हाल
कर्नाटक की राजधानी और भारत की सिलिकॉन वैली कहे जाने वाले बेंगलुरु में 75% किराएदारों ने कहा कि ज्यादा सिक्योरिटी डिपॉजिट की वजह से वे अपनी पसंद का घर किराए पर नहीं ले पाए। कई लोगों ने कहा कि उन्हें लोकेशन, साइज या सुविधाओं के मामले में समझौता करना पड़ा क्योंकि वे शुरुआती डिपॉजिट का इंतजाम नहीं कर पाए।
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