संगठन का कहना है कि सरकार द्वारा किए गए वादे अब तक पूरे नहीं हुए, जिससे हजारों शिक्षकों में असंतोष है। प्रदर्शन को “ऐतिहासिक” बनाने की रणनीति तैयार की गई है।
संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों के अनुसार, सालों से सेवा देने वाले अतिथि शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करना सरकार की जिम्मेदारी है और अब इसे लेकर निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान और उससे पहले बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन आज तक उन पर अमल नहीं हुआ।प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने कहा कि पहले अतिथि शिक्षकों को लेकर कई वादे किए गए थे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इन मुद्दों को लेकर पहले भी बड़े स्तर पर राजनीतिक समर्थन मिला था, लेकिन अब वही नेता इस मुद्दे पर चुप हैं। इससे शिक्षकों के बीच नाराजगी और बढ़ गई है।
अब तक ठोस कदम नहीं उठाए: नागर
संयुक्त मोर्चा के समन्वयक रामचंद्र नागर और बी.एम. खान ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सीधे सवाल किए हैं। उनका कहना है कि जब वे विधायक थे, तब उन्होंने अतिथि शिक्षकों को संविदा शिक्षक बनाने की अनुशंसा की थी, लेकिन अब मुख्यमंत्री बनने के बाद इस दिशा में ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं।