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भारतीय रेल की बड़ी तैयारी राख ढो कर भी कमाएगा करोड़ों रुपये

Updated on 20-06-2026 01:22 PM
नई दिल्ली: थर्मल पावर प्लांट से निकली राख ( Fly Ash ) कभी पावर प्लांट के लिए सर दर्द का सबब था। लेकिन जबसे इसका उपयोग सड़क बनाने, सीमेंट या ईंट बनाने में हो रहा है, इसे लेने के लिए बिजली घर के बाहर ट्रकों की लाइन लगी रहती है। अब रेलवे (Ministry of Railways) ने बिजली घर की इसी राख या छाई से करोड़ों रुपये की कमाई की पुख्ता योजना बना रहा है।

बेहद गंभीर है रेलवे

राख या छाई की ढुलाई के प्रति रेलवे कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें रेल मंत्री (Minister of Railways) अश्विनी वैष्णव खुद रुचि ले रहे हैं। इसी सप्ताह गुरुवार को रेलवे बोर्ड (Railway Board) में इस बारे में जब एक उच्च स्तरीय बैठक हुई तो खुद रेल मंत्री उसमें शामिल थे।

डेडिकेटेड लॉजिस्टिक नेटवर्क बनाने की योजना

रेलवे बोर्ड के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि रेल मंत्री ने जो एक उच्च स्तरीय बैठक की उसमें कई बातों पर चर्चा हुई। इस दौरान बिजली घर से निकली राख की ढुलाई में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए क्या हो सकता है, उसके विकल्पों पर भी विचार किया गया। सूत्र बताते हैं कि इस छाई की ढुलाई के लिए रेलवे एक डेडिकेटेड लॉजिस्टिक नेटवर्क भी बना सकता है।

अभी बहुत कम है हिस्सेदारी

  • थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली छाई की ढुलाई अभी ज्यादातर ट्रकों से ही होती है।
  • रेलवे ने यह काम शुरू किया है, लेकिन उसकी हिस्सेदारी बहुत कम है।
  • अनुमान है कि इस समय देशभर के ताप बिजली घरों से हर साल करीब 34 करोड़ टन राख निकलती है।
  • इसमें से फिलहाल रेलवे महज 130 लाख टन राख की ही ढुलाई कर रहा है।
  • रेलवे का मानना है कि यदि इसकी ढुलाई के लिए एक डेडिकेटेड सिस्टम बना दिया जाए तो कोयले की तरह इसकी राख भी रेलवे की कमाई का एक बड़ा जरिया हो सकता है।

फ्लाई ऐश क्या है

आपको पता ही होगा कि थर्मल पावर प्लांट में फीड स्टॉक के रूप में कोयले का इस्तेमाल होता है। इसे जलाने के बाद जो राख निकलती है, उसे ही तकनीकी भाषा में फ्लाई ऐश कहा जाता है। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में इसे छाई कहा जाता है। यह थर्मल पावर जेनरेशन का सबसे बड़ा बाय-प्रोडक्ट है। पहले जबकि इसका कोई उपयोग नहीं होता था तो यह बिजली घरों के लिए एक चुनौती थी। लेकिन जब से इसका कई सेक्टर में उपयोग होने लगा है, तब यह कमाई के जरिये के रूप में देखा जाने लगा है।

कहां होता है इसका उपयोग

थर्मल पावर प्लांट्स से निकले फ्लाई ऐश का सबसे ज्यादा उपयोग सड़क बनाने में हो रहा है। इसके अलावा ईंट बनाने, सीमेंट उत्पादन और अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में भी इसका जम कर इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकारी बिजली कंपनी एनटीपीसी के आंकड़ों के अनुसार साल 2024-25 में उत्पन्न फ्लाई ऐश का 32 प्रतिशत हिस्सा सड़क और फ्लाईओवर निर्माण में इस्तेमाल किया गया। इसके बाद 27 प्रतिशत हिस्सा सीमेंट उद्योग में और 14 प्रतिशत हिस्सा ईंट और टाइल बनाने में इस्तेमाल हुआ। बैकफिलिंग और माइंस को भी भरने में भी इसका क्रमश: 11 प्रतिशत और 10 प्रतिशत उपयोग किया गया। इनके अलावा कृषि क्षेत्र और रेडी-मिक्स कंक्रीट (RMC) वाले भी इसका उपयोग करते हैं।

कैसे होगी ढुलाई

बिजली घर से निकली राख हो या चूल्हे से निकली राख, इसका परिवहन सुरक्षित तरीके से नहीं किया जाए तो यह पर्यावरण के लिए घातक है। रेल अधिकारयों का कहना है कि इसके लिए विशेष रूप से डिजाइन किये गए कंटेनरों का इस्तेमाल करना होगा। इस समय कोयले की ढुलाई के लिए इस्तेमाल किए जा रहे बॉक्स एन वैगन में भी इसकी ढुलाई हो सकती है, लेकिन उसे ठीक तरह से ढंकना होता है। ताकि राख हवा में उड़े नहीं।

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