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संकट में RBI बनेगा सरकार का सहारा, मिल सकता है बंपर डिविडेंड

Updated on 13-05-2026 06:52 PM
नई दिल्ली: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ( RBI ) इस साल केंद्र सरकार को अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड दे सकता है। सूत्रों के मुताबिक, यह रकम सरकार को मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) संकट से पैदा हुई आर्थिक चुनौतियों से निपटने में बड़ा वित्तीय सहारा दे सकती है।

पिछले साल RBI ने 2024-25 के लिए केंद्र सरकार को रेकॉर्ड 2.69 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड ट्रांसफर किया था, जो इससे पिछले वर्ष के 2.11 लाख करोड़ रुपये से 27 फीसदी ज्यादा था। अब उम्मीद जताई जा रही है कि इस साल यह राशि और बढ़ सकती है। सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस महीने होने वाली अपनी बोर्ड बैठक में डिविडेंड की अंतिम राशि पर फैसला ले सकता है।

फायदा ही फायदा

  • सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आरबीआई , सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों से 3.16 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड और सरप्लस मिलने का अनुमान लगाया है। यह पिछले वित्त वर्ष से करीब 3.75% अधिक है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1.98 लाख करोड़ रुपये का ऐतिहासिक शुद्ध लाभ दर्ज किया है, जो पिछले वर्ष से 11.1% अधिक है। इससे सरकार की गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue) में बड़ी बढ़ोतरी होगी।
  • बजट में सार्वजनिक उपक्रमों और अन्य निवेशों से 75,000 करोड़ रुपये डिविडेंड मिलने का अनुमान लगाया गया है, जो चालू वित्त वर्ष के 71,000 करोड़ रुपये से अधिक है।

कंट्रोल में होगा सरकार का घाटा

पश्चिम एशिया युद्ध और वैश्विक अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर हैं। वहीं विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव है। ऐसे में रिजर्व बैंक का यह बंपर डिविडेंड सरकार को राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने और बुनियादी ढांचे पर खर्च जारी रखने में मदद करेगा।

सरकार की नॉन-टैक्स आय का हिस्सा

डिविडेंड और आरबीआई सरप्लस ट्रांसफर सरकार की नॉन-टैक्स आय का हिस्सा होते हैं। केंद्र सरकार ने अगले वित्त वर्ष में कुल 6.66 लाख करोड़ रुपये नॉन-टैक्स रेवेन्यू मिलने का अनुमान लगाया है, जबकि टैक्स रेवेन्यू 7.18 फीसदी बढ़कर 28.66 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।

यह सरप्लस रिजर्व बैंक के संशोधित इकनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क (ECF) के आधार पर तय किया जाता है। इसके तहत कंटीजेंट रिस्क बफर (CRB) को आरबीआई की बैलेंस शीट के 4.5% से 7.5% के दायरे में बनाए रखना जरूरी है। इसके बाद बची अतिरिक्त राशि सरकार को हस्तांतरित की जाती है।

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