CJI सूर्यकांत, जस्टिस विपुल एम पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि जमानत के मामलों पर आदेश भी उसी दिन सुनाए जाएं। अगर फैसला रिजर्व रखा जाता है, तो उसे अगले दिन जरूर सुना दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने ये निर्देश पिला पहन और झारखंड सरकार से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान दिए। इससे जुड़ी याचिका में कहा गया था कि हाईकोर्ट ने फैसला अपलोड नहीं किया है।
पहले उस मामले को जानें, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए
यह मामला अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के 4 दोषियों की याचिका से जुड़ा था। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि झारखंड हाईकोर्ट में उनकी क्रिमिनल अपील 2022 से बिना किसी फैसले के पेंडिंग है। याचिका में तर्क दिया गया कि इस प्रकार की देरी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है, जिसमें जल्द सुनवाई का अधिकार भी शामिल है।
नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट से अपने फैसलों की टाइम लिमिट रिपोर्ट सबमिट करने का आदेश दिया था, जिसमें फैसले रिजर्व रखने की तारीखें, फैसले सुनाए जाने की तारीखें और उन्हें वेबसाइट पर अपलोड करने की तारीखें शामिल थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट को 13 निर्देश दिए