इस तस्वीर में जुनैद बड़े चमचे से लोगों की प्लेट में खाना परोस रहे हैं। पूरे आंदोलन में जुनैद किसी मंच या भाषण का हिस्सा नहीं बने। उनकी पहचान उस शख्स के रूप में बनी जो चुपचाप रसोई, पानी, फल और बिस्किट की व्यवस्था संभालता रहा, ताकि आंदोलन में आए लोगों को किसी चीज की कमी न हो।
हर थाली में सम्मान
जुनैद ने हर व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के अपने हाथों से खाना परोसा। उनके लिए यह सिर्फ भोजन बांटना नहीं, बल्कि हर प्रदर्शनकारी की गरिमा और जरूरत का सम्मान करना था।