- क्यों उठाया कदम?
ऑर्गनाइजेशन फॉर इकनॉमिक कोऑपरेशन एंड डिवेलपमेंट और भारत सहित भागीदार देशों ने मिलकर क्रिप्टो असेट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क (CARF) बनाया है। इसमें क्रिप्टो एक्सचेंजों सहित सभी रिपोर्टिंग क्रिप्टो-असेट सर्विस प्रोवाइडर्स (RCASP) के दायित्व तय किए गए हैं। इस फ्रेमवर्क के हिसाब से CBDT ने ताजा कदम उठाया है। इससे CARF के तहत वैश्विक स्तर पर जानकारी जुटाने में आसानी होगी। - क्या हैं मायने?
कई निवेशक विदेशी ट्रांजैक्शन सहित अपने ट्रेड्स को रिटर्न में दिखाना भूल जाते हैं। अब एक्सचेंजों के लिए जानकारी देना अनिवार्य करने से टैक्स विभाग को इनसे पूरी जानकारी मिल जाएगी और निवेशकों के सेल्फ डिक्लेरेशन तक बात सीमित नहीं रहेगी। इससे करदाता के एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट और संबंधित दस्तावेज को ऑटो-पॉपुलेट करने और जानकारी को क्रॉस वेरिफाई करने में आसानी होगी। करदाताओं के लिए कोई नई जिम्मेदारी तय नहीं की गई है, लेकिन उन्हें भी अब जानकारी देने में सतर्कता बरतनी होगी।क्रिप्टो से जुड़े टैक्स स्ट्रक्चर में कोई बदलाव नहीं हुआ। क्रिप्टो भारत में रुपये की तरह लीगल टेंडर भी नहीं है। वर्चुअल डिजिटल असेट्स से कैपिटल गेंस पर 30% के फ्लैट रेट से ही टैक्स लगेगा। क्रिप्टो ट्रेडिंग में लॉस को दूसरे गेंस से ऑफसेट नहीं किया जा सकता या आने वाले वित्त वर्षों के लिए कैरी फॉरवर्ड नहीं किया जा सकता। - दायित्व किस पर?
एक्सचेंजों सहित RCASP को लेनदेन से जुड़ी जानकारी जुटानी होगी और वेरिफाई करके उसे टैक्स विभाग को देना होगा। उन्हें कस्टमर की टैक्स रेजिडेंसी सहित पूरी जांच-पड़ताल करनी होगी, KYC कराना होगा और एनुअल ट्रांजैक्शन इंफॉर्मेशन भी देना होगा। इस तरह टैक्स विभाग के लिए क्रिप्टो एक्सचेंज जानकारी पाने का प्राथमिक जरिया बन जाएंगे। - क्या कहना है एक्सपर्ट का?
Mudrex के CEO एडुल पटेल ने कहा, 'रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड्स CARF के मुताबिक करने से भारत मौजूदा टैक्स व्यवस्था को बदले बिना क्रिप्टो असेट्स को एक व्यवस्थित फाइनैंशल रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क में ला रहा है। इस कदम ने एक व्यापक पॉलिसी फ्रेमवर्क की नींव रखी है। इससे नीति-निर्माताओं को निवेशकों की रक्षा और इनोवेशन को बढ़ावा देने के संतुलित नियम बनाने में मदद मिलेगी।'