जीआरपी की पूछताछ में किशोरी ने बताया कि उसके माता-पिता इटारसी में रहते हैं। पिछले करीब एक वर्ष से उसका पिता ही उसे ट्रेन में बैठाकर भोपाल सहित विभिन्न रेलवे रूटों पर भीख मांगने के लिए भेजता था। कभी वह भोपाल आने वाली ट्रेनों में रहती थी तो कभी नागपुर रूट पर जाकर यात्रियों से भीख मांगती थी।
जीआरपी थाना प्रभारी जहीर खान के अनुसार, किशोरी के पास मिला क्यूआर कोड उसके पिता के मोबाइल नंबर से संचालित हो रहा था। इससे स्पष्ट हुआ कि पारंपरिक तरीके से मिलने वाले छुट्टे पैसों के साथ अब डिजिटल भुगतान के जरिए भी भीख ली जा रही थी। इस मामले ने भिक्षावृत्ति के नए तरीके की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है।
नाबालिग होने के कारण जीआरपी ने बच्ची को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए समिति ने उसके पिता के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की। इसके बाद जीआरपी ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा-76 के तहत एफआईआर दर्ज कर ली। इस प्रावधान के अनुसार, बच्चे से भिक्षावृत्ति कराने वाले अभिभावक या वैध संरक्षक को अधिकतम पांच वर्ष की कैद और एक लाख रुपये तक जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
पूछताछ के दौरान किशोरी यह नहीं बता सकी कि उसके जैसे और कितने बच्चे रेलवे स्टेशनों पर भीख मांगते हैं। हालांकि, जीआरपी अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं बच्चों को संगठित तरीके से अलग-अलग रेलवे स्टेशनों पर भेजने वाला कोई नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है। इसके लिए अलग-अलग टीमें गठित कर जांच शुरू कर दी गई है।
मध्यप्रदेश जीआरपी का ऑपरेशन हमदर्द एक से 31 जुलाई तक संचालित किया जा रहा है। अभियान के तहत रेलवे स्टेशनों पर रहने वाले बेसहारा, निराश्रित, परित्यक्ता महिलाओं, नाबालिग बच्चों और भिक्षावृत्ति करने वालों की पहचान कर उनका डिजिटल डोजियर तैयार किया जा रहा है। साथ ही जरूरतमंद लोगों के पुनर्वास और बिछड़े लोगों को उनके परिजनों से मिलाने की कार्रवाई भी की जा रही है।