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12 एग्‍जाम में फेल, फिर 'SDM चायवाला' बनी पहचान, अब 1 लाख महीने की कमाई

Updated on 09-06-2026 01:43 PM
नई दिल्‍ली: गोपाल सिंह 'SDM चायवाला' के नाम से मशहूर हैं। उनका स्‍टॉल कोटा के जवाहर नगर इलाके में एलन समुन्‍नत बिल्डिंग के ठीक सामने लगता है। कभी वह सिविल सेवा की तैयारी करने कोटा आए थे। वह मूल रूप से झालावाड़ के रहने वाले हैं। गोपाल अब अपनी चाय और वड़ा पाव की दुकान से महीने में लगभग 1,00,000 रुपये कमाते हैं। आइए, यहां गोपाल सिंह की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।

गोपाल सिंह अक्सर सोचते हैं कि अगर वह सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) बन भी जाते तो उनकी शुरुआती सैलरी लगभग 56,000 रुपये होती। इसके बजाय उनका मानना है कि किस्मत उन्हें एंटरप्रेन्योरशिप के जरिए एक ज्‍यादा आजाद और फायदेमंद रास्ते पर ले गई।

12 प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए फेल

गोपाल सिंह मूल रूप से राजस्‍थान के झालावाड़ से हैं। उन्‍होंने LDC, पटवारी, ग्राम सेवक, कॉन्स्टेबल, फॉरेस्ट गार्ड और RAS समेत 10 से 12 प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लिया। हालांकि, वह कभी भी फाइनल राउंड में नहीं चुने गए।

बार-बार मिली नाकामियों और कोरोना महामारी के दौरान भारी आर्थिक तंगी का सामना करने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।

2022 में 'SDM चायवाला' की शुरुआत

2022 में गोपाल ने जवाहर नगर में अपनी दुकान 'SDM चायवाला' शुरू की। उनका कहना है कि अगर वह अधिकारी बनते तो सरकारी नियमों और कानूनों से बंधे होते। आज वह खुद अपने बॉस हैं।

सभी फाइनेंशियल टारगेट पूरे

उनका सपना सीधा-सादा था- सम्मान के साथ जीना, अपना घर होना और कार खरीदना। अपने छोटे से स्टार्टअप के जरिए उन्होंने यह सब हासिल कर लिया है। उनका पक्का यकीन है कि हर नाकामी एक बड़े सफर की शुरुआत होती है।

चाय के साथ 'मोटिवेशन' की घुट्टी

गोपाल की चाय और वड़ा पाव कोटा के कोचिंग स्टूडेंट्स के बीच खास तौर पर मशहूर हैं। हालांकि, वह सिर्फ खाने-पीने की चीजें ही नहीं देते, बल्कि हिम्मत भी बढ़ाते हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के बीच अपना दिन बिताते हुए गोपाल उन्हें लगातार हिम्मत न हारने के लिए प्रेरित करते हैं। पढ़ाई के भारी दबाव वाले शहर में वह स्टूडेंट्स को सलाह देते हैं कि कोई भी गलत कदम उठाने से पहले अपने माता-पिता के बारे में सोचें।गोपाल सिंह यह भी सुझाव देते हैं कि स्टूडेंट्स को अपनी पढ़ाई के साथ छोटा-मोटा पार्ट-टाइम काम भी करना चाहिए ताकि वे आर्थिक रूप से आजाद और आत्मनिर्भर बन सकें।

आत्मनिर्भरता और हिम्‍मत की मिसाल

गोपाल का यकीन है कि परीक्षा में फेल होने का मतलब जिंदगी का खत्म होना नहीं है। आज जवाहर नगर में उनका स्टॉल सिर्फ चाय की गाड़ी नहीं, बल्कि युवाओं के लिए हिम्मत और आत्मनिर्भरता की एक जीती-जागती मिसाल है।

उनका सफर उन अनगिनत युवाओं को प्रेरित करता है जो सरकारी नौकरी न मिल पाने के कारण निराश हो जाते हैं। गोपाल सिंह की कहानी साबित करती है कि पक्के इरादे और कड़ी मेहनत से एक मामूली चाय के स्टॉल से भी सम्मान और आर्थिक स्थिरता दोनों हासिल की जा सकती हैं।


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