कच्चे तेल का झटका और कमजोर होता रुपया, फिर भी RBI ने क्यों नहीं बढ़ाया रेपो रेट
Updated on
05-06-2026 02:23 PM
नई दिल्ली: दुनियाभर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये के दबाव के बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखने का फैसला लिया। आरबीआई का यह कदम घरेलू आर्थिक विकास को रफ्तार देने और महंगाई को नियंत्रण में रखने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश को दिखाता है।
आरबीआई के इस फैसले के पीछे की मुख्य वजह यह है कि भारत में खुदरा महंगाई दर ( Retail Inflation ) फिलहाल नियंत्रण में है। अप्रैल के महीने में खुदरा महंगाई घटकर 3.48% पर आ गई थी, जो केंद्रीय बैंक के 4% के मध्यम अवधि के लक्ष्य से नीचे है। पिछले एक साल से अधिक समय से महंगाई का ग्राफ इस लक्ष्य से नीचे बना हुआ है, जिसके कारण नीति निर्माताओं को तुरंत ब्याज दरें बढ़ाने की जरूरत महसूस नहीं हुई।
कच्चा तेल आसमान पर
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 90% आयात करता है। ईरान संकट और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें युद्ध-पूर्व स्तर से लगभग 30% ऊपर बनी हुई हैं। वित्त मंत्रालय ने भी चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही में आ रही रुकावट भारत के आर्थिक और कीमत परिदृश्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
रुपये में बड़ी गिरावट
विदेशी फंडों की निकासी के कारण इस साल रुपया 5% से अधिक कमजोर होकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, गवर्नर ने आश्वस्त किया कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत है और भारतीय अर्थव्यवस्था इस वैश्विक उथल-पुथल का सामना करने के लिए पिछली बार की तुलना में कहीं बेहतर स्थिति में है।
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