अमेरिका-ईरान डील के बाद होर्मुज पार करने वाले इस भारतीय टैंकर ने रचा इतिहास, लदी है 62,370 टन एलएनजी
Updated on
16-06-2026 12:12 PM
नई दिल्ली: अमेरिका-ईरान समझौते की घोषणा के बाद एक भारतीय लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरा है। यह ऐसा करने वाले शुरुआती बड़े कमर्शियल जहाजों में से एक बन गया है। होर्मुज दुनिया के सबसे अहम एनर्जी कॉरिडोर में से एक है। भारतीय टैंकर का गुजरना इस स्ट्रेट के जरिए शिपिंग की सावधानीपूर्वक बहाली का संकेत है।
कतर से ला रहा 62,370 टन LNG
शिपिंग अधिकारियों ने बताया कि:
एलएनजी कैरियर 'दिशा' ने सोमवार को रणनीतिक रूप से अहम इस जलमार्ग को पार किया।
इसके 18 जून को गुजरात के दाहेज बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद है।
यह जहाज कतर से 62,370 टन LNG लेकर आ रहा है।
इसे शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाला एक कंसोर्टियम मैनेज कर रहा है।
ट्रंप की घोषणा के बीच हुआ ऐसा
यह घटनाक्रम तब हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच अहम समझौते के बाद तेल से लदे जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने लगे हैं।
ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में कहा, 'होर्मुज स्ट्रेट से जहाज गुजरने लगे हैं। इनमें से कई तेल से लदे हैं।' उन्होंने कहा कि जहाज उस रास्ते से गुजर रहे हैं जिसे उन्होंने सुरक्षित मार्ग बताया।
इस तरह रच दिया इतिहास
मैरीटाइम ट्रैकिंग डेटा से पता चला कि शुरुआती अमेरिका-ईरान समझौते की घोषणा के बाद इस स्ट्रेट से गुजरने वाले शुरुआती कमर्शियल जहाजों में 'दिशा' शामिल था। अपनी यात्रा फिर से शुरू करने से पहले यह टैंकर संघर्ष के दौरान तीन महीने से अधिक समय तक फारस की खाड़ी में फंसा रहा था।
संघर्ष के दौरान इस क्षेत्र से गुजरने वाले कई जहाजों के उलट 'दिशा' ने पूरी यात्रा के दौरान अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) चालू रखा। लगातार अपनी लोकेशन और डेस्टिनेशन की जानकारी भेजता रहा। जहाज ने स्ट्रेट से गुजरने वाले स्टैंडर्ड कमर्शियल शिपिंग रूट का पालन किया। इसमें ईरान के लराक द्वीप के पास का समुद्री इलाका भी शामिल था।
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