भोपाल। स्वच्छ सर्वेक्षण में देशभर में दूसरा स्थान हासिल करने के बाद अब भोपाल नगर निगम “स्वच्छ सुपर लीग” में जगह बनाने की तैयारी में जुट गया है
इसके लिए नगर निगम ने कई ऐसे नवाचार शुरू किए हैं, जो देशभर के शहरों के लिए मॉडल बन सकते हैं।
नगर निगम अब भानपुर के बाद आदमपुर कचरा खंती में जमा कचरे के पहाड़ को खत्म करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।
वहीं, धूल नियंत्रण के लिए कचरा वाहनों पर स्प्रिंकलर सिस्टम, गन्ने के छिलकों से सीएनजी निर्माण और अलग-अलग वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट शहर को नई पहचान दे रहे हैं।
आदमपुर कचरा खंती में जमा लगभग 700 मीट्रिक टन कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यहां नेशनल थर्मल पावर कार्पोरेशन (एनटीपीसी) सूखे कचरे से टोरिफाइड चारकोल तैयार कर रहा है।
प्रतिदिन 400 टन सूखे कचरे के निस्तारण की क्षमता वाला यह प्लांट शहर को सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट मॉडल के रूप में स्थापित करेगा।
निगम प्रशासन का दावा है कि 330 दिनों के भीतर आदमपुर खंती के कचरे के पहाड़ को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा।
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत नगर निगम सड़कों और कचरा कलेक्शन के दौरान उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए विशेष प्रयास कर रहा है।
डोर-टू-डोर कचरा वाहनों में स्प्रिंकलर लगाए गए हैं, जो कचरा डालते समय पानी का छिड़काव करते हैं। इसके अलावा सड़क किनारों पर पेवर ब्लॉक लगाए जा रहे हैं, ताकि धूल कम उड़ सके।
मेट्रो, एनएचएआई और पीडब्ल्यूडी जैसी एजेंसियों को भी निर्माण कार्यों के दौरान धूल नियंत्रण के निर्देश दिए गए हैं।
भोपाल को पहले ही “सात-स्टार गार्बेज फ्री सिटी” और “वाटर प्लस सिटी” का दर्जा मिल चुका है। शहर में हर दिन लगभग 850 टन कचरा निकलता है, जिसमें 500 टन गीला और 350 टन सूखा कचरा शामिल है।
इसे 100 प्रतिशत कलेक्ट करने के लिए नगर निगम ने 467 डोर-टू-डोर कचरा वाहन, 629 सीएनजी गाड़ियां और 162 रोड स्वीपिंग मशीनें मैदान में उतार रखी हैं।