एयर इंडिया ने टाटा को दिया 55,000 करोड़ का घाटा, कैसे होगा बेड़ापार
Updated on
13-06-2026 12:30 PM
नई दिल्ली: एयर इंडिया का एक विमान पिछले साल 12 जून को अहमदाबाद में हादसे का शिकार हो गया था। उसके बाद से कंपनी को पिछले एक साल में करीब तीन अरब डॉलर यानी 28,500 करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है। इसे देखते हुए टाटा ग्रुप ने एयर इंडिया को अपने रेकॉर्ड नुकसान को कम करने पर ध्यान देने को कहा है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि एयर इंडिया विमानों की डिलीवरी टालने, उड़ानें कम करने और विस्तार की योजनाओं को आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है।
रणनीति में यह बदलाव कंपनी की महत्वाकांक्षी विकास योजना से एकदम अलग है। इस कटौती में लागत कम करने के कई प्रयास शामिल होंगे। सूत्रों ने बताया कि कंपनी एयरबस और बोइंग के साथ बातचीत कर रही है ताकि पहले ऑर्डर किए गए 500 विमानों की डिलीवरी की गति धीमी की जा सके। इससे एयर इंडिया डिलीवरी के समय किए जाने वाले बड़े भुगतान को टाल सकेगी।
एयर इंडिया की चुनौती
एयर इंडिया साथ ही नई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की योजनाओं की भी समीक्षा कर रही है, कुछ रूट कम कर रही है और कुछ हवाई अड्डों पर सेवाएं शुरू करने में देरी कर रही है। इनमें नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी शामिल है। एयर इंडिया की कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है जिससे उसे भारी नुकसान हआ है। इस कारण उसे अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं पर ब्रेक लगाना पड़ रहा है।
पिछले साल जून में अहमदाबाद में हुए क्रैश, पाकिस्तान के भारतीय एयरलाइंस के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद करने और ईरान युद्ध के कारण उड़ानें बाधित हुईं, लंबे रूट लेने पड़े और ईंधन का खर्च बढ़ गया। रुपये में गिरावट ने भी उसकी वित्तीय मुश्किलों को बढ़ा दिया क्योंकि एयरलाइन का अधिकांश खर्च डॉलर में होता है।
कुल घाटा
टाटा ग्रुप ने 2022 में एयर इंडिया को खरीदा था। एयर इंडिया को 2022 से अब तक 55,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा हो चुका है। यह नुकसान टाटा ट्रस्ट्स के बोर्ड के लिए चिंता का एक बड़ा विषय है। टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के पास एयर इंडिया की ज्यादातर हिस्सेदारी है। सिंगापुर एयरलाइंस ने 2024 में एयर इंडिया में 25.1% हिस्सेदारी खरीदी थी।
टाटा ग्रुप चाहता है कि एयर इंडिया अपनी ग्रोथ स्ट्रैटजी को थोड़ा धीमा करे, अपने कामकाज को स्थिर करने तथा लागत कम करने के उपायों को लागू करने पर ध्यान दे। हालांकि एयर इंडिया के एक प्रवक्ता ने कहा कि एयरलाइन अपने बेड़े को आधुनिक बनाने और बदलाव की अपनी दीर्घकालिक योजना को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। टाटा और एयरबस ने टिप्पणी के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया। बोइंग के प्रवक्ता ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
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