दुनिया का सबसे बड़ा क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बाइनेंस हैक हो गया है। इसे इतिहास की सबसे बड़ी क्रिप्टो हैकिंग माना जा रहा है। सुरक्षा जांच पूरी होने तक बाइनेंस अकाउंट में न तो नया पैसा जमा किया जा सकता है और न ही अंदर मौजूद पैसा या क्रिप्टो बाहर निकाला जा सकता है।

क्रिप्टो एक्सपर्ट्स और एनालिटिक्स फर्म्स का अनुमान है कि इस हैकिंग में 5 बिलियन डॉलर से ज्यादा यानी करीब 50 हजार करोड़ रुपए की क्रिप्टो करेंसी चोरी हुई है। घटना के बाद बिटकॉइन समेत अन्य क्रिप्टो करेंसीज में 5% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है।

क्रिप्टोकरेंसी एक तरह का डिजिटल पैसा है, जिसे ऑनलाइन खरीदा-बेचा जा सकता है। इसे कोई सरकार या बैंक जारी नहीं करता, बल्कि यह ब्लॉकचेन तकनीक से चलता है।

इस पूरे मामले को सवाल-जवाब में समझिए…

सवाल 1. बाइनेंस में क्या गड़बड़ी हुई है और कंपनी ने क्या कदम उठाए हैं?

जवाब: बाइनेंस के डिजिटल लॉकर में सेंध लग गई है। किसी हैकर ने बाइनेंस के सुरक्षा तंत्र को तोड़कर उसके सिस्टम में घुसपैठ की और हजारों करोड़ रुपए के क्रिप्टो कॉइन्स चुरा लिए।

कंपनी ने तुरंत 3 बड़े कदम उठाए हैं…

  • लेन-देन पर तुरंत रोक लगाई: जैसे ही सेंधमारी का पता चला, बाइनेंस ने ग्राहकों के पैसे जमा करने और निकालने पर तुरंत रोक लगा दी, ताकि चोर और पैसे न निकाल सकें।

  • भरपाई की गारंटी दी: बाइनेंस ने अपने ग्राहकों को भरोसा दिलाया है कि उनका पैसा सुरक्षित है। अगर जांच में ग्राहकों का कोई नुकसान साबित होता है, तो कंपनी उसकी भरपाई करेगी।

  • जांच शुरू की: कंपनी की सुरक्षा टीमें अंतरराष्ट्रीय पुलिस और साइबर एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर हैकर्स का पता लगाने में जुटी हैं। चोरों के रास्तों को बंद कर दिया है।


सवाल 2. हैकिंग में कुल कितने क्रिप्टो के नुकसान का अनुमान है?

जवाब: बाइनेंस ने अभी तक चोरी हुई क्रिप्टो का खुलासा नहीं किया है, लेकिन क्रिप्टो एनालिटिक्स फर्म्स ने बड़े नुकसान का अनुमान जताया है।

ग्लासनोड के मुताबिक $5.3 बिलियन। वहीं चेनालिसिस के अनुसार $5.9 बिलियन यानी करीब 50 हजार करोड़ रुपए की क्रिप्टो चोरी हुई है।

सवाल 3. क्रिप्टो इंडस्ट्री के इतिहास में यह घटना कितनी बड़ी मानी जा रही है?

जवाब: अगर अनुमान सही साबित होते हैं, तो यह इतिहास की सबसे बड़ी क्रिप्टो डकैती हो सकती है। इससे पहले 2025 में दुबई स्थित क्रिप्टो एक्सचेंज बायबिट से उत्तर कोरियाई हैकर्स द्वारा की गई चोरी अब तक की सबसे बड़ी घटना थी। तब 1.5 बिलियन डॉलर की हैकिंग हुई थी। यानी, बाइनेंस में हुई यह चोरी बायबिट घटना से लगभग चार गुना बड़ी है।


सवाल 4. इस ब्रीच से कितने यूजर्स प्रभावित हुए हैं? क्या भारतीयों पर भी असर पड़ा है?

जवाब: बाइनेंस के 100 से ज्यादा देशों में 30 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर्स हैं। इनमें 2 से 2.5 करोड़ भारतीय यूजर्स होने का अनुमान है। हालांकि, कितने यूजर्स के व्यक्तिगत अकाउंट्स पर असर पड़ा है, इसका सटीक आंकड़ा बाइनेंस ने अभी जारी नहीं किया है। राहत की बात यह है कि बाइनेंस का अमेरिकी डिवीजन बाइनेंस US इस घटना से पूरी तरह सुरक्षित है।

सवाल 5. हैकर्स ने सिस्टम में सेंध कैसे लगाई? शुरुआती जांच में क्या सामने आया है?

जवाब: बाइनेंस के अनुसार, यह सेंधमारी उनके एक डेवलपर इंजीनियर के लैपटॉप के हैक होने से जुड़ी हो सकती है। आशंका है कि इस लैपटॉप के जरिए हैकर्स ने सर्विस कंटेनर तक पहुंच बनाई और अनऑथराइज्ड विड्रॉल के ऑर्डर सबमिट कर दिए। हालांकि, बाइनेंस ने यह भी साफ किया है कि किसी भी यूजर के प्राइवेट की लीक होने के सबूत नहीं मिले हैं।


सवाल 6. एसेट्स को फ्रीज करने के लिए अब तक क्या-क्या कार्रवाई हुई है?

जवाब: बाइनेंस ने खुद करीब $3 बिलियन यानी लगभग 29,000 करोड़ रुपए के डिजिटल एसेट्स फ्रीज किए हैं। इसके अलावा दो अन्य प्रमुख क्रिप्टो प्लेटफॉर्म टेदर ने $1.6 बिलियन और सर्कल ने $800 मिलियन के एसेट्स फ्रीज किए हैं। कुल मिलाकर तीनों कंपनियों ने लगभग $5.4 बिलियन यानी करीब ₹50,000 करोड़ के एसेट्स को ब्लॉक कर दिया है।

सवाल 7. हैकर इन क्रिप्टो को पैसे में कैसे बदलेंगे?

जवाब: बाइनेंस, टेदर और सर्कल ने जो एसेट ब्लॉक किए हैं, वह तो सिस्टम में फ्रीज चुका है और हैकर उसे कभी नहीं निकाल पाएंगे। लेकिन जिस हिस्से को हैकर फ्रीज होने से पहले ही प्राइवेसी कॉइन्स या मिक्सर्स में ट्रांसफर करने में कामयाब हो गए, उसी को वे नीचे दिए गए तरीकों से थोड़ा-थोड़ा करके असली पैसे में बदल पाते हैं।

स्टेप 1 (क्रिप्टो मिक्सर्स): हैकर 'टॉरनेडो कैश' जैसी मिक्सिंग सर्विस का इस्तेमाल कर चुराई हुई क्रिप्टो को लाखों वैध फंड्स के साथ मिक्स करते हैं, जिससे पैसों का शुरुआती सोर्स छुप जाता है।

स्टेप 2 (डिसेंट्रलाइज्ड एक्सचेंज): हैकर 'यूनिस्वैप' जैसे DEX प्लेटफॉर्म्स पर जाते हैं जहां बिना पहचान (KYC) दिए चुराई गई क्रिप्टो को आसानी से किसी अन्य टोकन में बदल लिया जाता है।

स्टेप 3 (प्राइवेसी कॉइन्स): हैकर फंड्स को 'मोनरो' (XMR) जैसे प्राइवेसी कॉइन्स में कन्वर्ट करते हैं, जिसकी ब्लॉकचेन पर लेन-देन पूरी तरह गुप्त रहने से ट्रैकिंग का लिंक टूट जाता है।

स्टेप 4 (P2P व डार्क वेब): पहचान छिपाने के बाद हैकर डार्क वेब या P2P नेटवर्क पर 'कैश-इन-हैंड' खरीदारों को क्रिप्टो बेचकर सीधे नकद या अन्य माध्यमों से पैसा हासिल करते हैं।

स्टेप 5 (फर्जी बैंक खाते): हैकर डार्क वेब से खरीदे गए फर्जी पासपोर्ट/आईडी से बने शेल कंपनियों के बैंक खातों में थोड़ा-थोड़ा करके पैसा भेजते हैं और उसे कैश निकालकर गायब हो जाते हैं।

सवाल 7. बाइनेंस के पूर्व सीईओ चांगपेंग झाओ (CZ) ने इस घटना पर क्या कहा?

जवाब: बाइनेंस के पूर्व प्रमुख चांगपेंग झाओ (CZ) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह घटना एक हैक जैसी ही दिखाई दे रही है। CZ अब कंपनी का प्रबंधन नहीं संभालते हैं, लेकिन वे अभी भी बाइनेंस के प्रमुख शेयरधारक हैं।


सवाल 8. इस घटना से क्रिप्टो मार्केट पर क्या असर पड़ा है?

जवाब: अलर्ट जारी होते ही दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन की कीमत में करीब 5% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा एथेरियम और सोलाना जैसी अन्य प्रमुख डिजिटल करेंसीज के भाव भी करीब-करीब इतने ही नीचे गिरे हैं।


सवाल 9. बाइनेंस क्या है और इसका ग्लोबल नेटवर्क कितना बड़ा है?

जवाब: बाइनेंस की स्थापना 2017 में चांगपेंग झाओ ने चीन में की थी। डेली ट्रेडिंग वॉल्यूम के लिहाज से यह दुनिया का सबसे बड़ा क्रिप्टो एक्सचेंज है। दुनिया भर में इसके 30 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर्स हैं। 2024 के आंकड़ों के मुताबिक बाइनेंस के पास पूरी दुनिया के लोगों का 160 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹15 लाख करोड़ का डिजिटल पैसा जमा है।

सवाल 10. इस जांच में आगे क्या होने वाला है और यूजर्स को क्या सलाह दी गई है?

जवाब: बाइनेंस की टीमें लॉ एनफोर्समेंट के साथ मिलकर काम कर रही हैं। कंपनी ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद एक विस्तृत 'पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट साझा की जाएगी। तब तक यूजर्स को केवल बाइनेंस के आधिकारिक चैनलों के अपडेट्स पर ही भरोसा करने की सलाह दी गई है।

नॉलेज पार्ट: क्या होता है ‘एसेट फ्रीजिंग’?

जब किसी क्रिप्टो एक्सचेंज पर सेंधमारी होती है, तो हैकर्स चुराए गए फंड को तुरंत किसी दूसरे वॉलेट में ट्रांसफर करने या कैश कराने की कोशिश करते हैं। टेदर (USDT) और सर्कल (USDC) जैसी स्टेबलकॉइन जारी करने वाली कंपनियां ब्लॉकचेन लेवल पर एड्रेस को 'ब्लैकलिस्ट' या 'फ्रीज' कर सकती हैं। इससे हैकर उन पैसों को आगे ट्रांसफर या भुना नहीं पाता।


बिटकॉइन की कीमत पहली बार ₹1.08 करोड़ के पार पहुंच गई है। 2009 में इसकी वैल्यू शून्य के करीब थी। इस करेंसी से कई दिलचस्प किस्से भी जुड़े हैं।

जैसे जिस व्यक्ति ने इसे बनाया है उसे कोई नहीं जानता। उसने अपने आप को गुमनाम रखा है। बस एक रहस्यमयी नाम सामने आया- सतोशी नाकामोतो।

इसी तरह 2010 में खरीदा गया वो पिज्जा भी कोई नहीं भूल सकता, जिसे 10,000 बिटकॉइन देकर खरीदा गया था। एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने इसे खरीदा था।

अगर वो इंजीनियर उस समय ये पिज्जा नहीं खरीदता और ये बिटकॉइन अपने पास रखता तो इन बिटकॉइन्स की कीमत 10 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा होती।