अल नीनो पर विश्व मौसम विज्ञान संगठन की भविष्यवाणी, जून से अगस्त तक 80 फीसदी आने की संभावना, मॉनसून पर खतरा
Updated on
03-06-2026 05:23 PM
वॉशिंगटन: दुनिया भर के मौसम और भारत में आने वाले मॉनसून के लिए एक बुरी खबर सामने आई है। विश्व मौसम संगठन (WMO) ने मंगलवार को अपनी चेतावनी में बताया है कि इस साल जून और अगस्त के बीच अल नीनो बनने की संभावना 80% फीसदी है। यह चेतावनी अल नीनो के बारे में पिछले आकलन में बदलाव को दिखाती है।
कुछ दिन पहले ही अमेरिका के क्लाइमेट पूर्वानुमान केंद्र ने भी अल नीनो के अनुमान को बढ़ाकर 82% कर दिया था। इसके पहले अप्रैल में यह 65 फीसदी रखा गया था। ये बदलाव बताते हैं कि प्रशांत महासागर में होने वाली घटना के चलते शुरू हुआ वायुमंडलीय बदलाव तेजी से हो रहा है।
क्या है अल नीनो?
अल नीनो उस घटना को कहा जाता है, जिसमें मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का जल अपने लंबे समय के औसत से गर्म हो जाता है। आम तौर पर 9 से 12 महीने तक चलने वाला यह सिस्टम दुनिया भर के तापमान और बारिश के पैटर्न को बुरी तरह प्रभावित करता है। इससे मौसम में बदलाव का खतरा बढ़ता है।
अल नीनो का भारत पर असर
अल नीनो की घटना दक्षिण एशिया में मॉनसून को कमजोर करती है। इसका मतलब है कि इस बार भारत में मॉनसून कमजोर हो सकता है, जिसके चलते ज्यादा तेज गर्मी का सामना करना पड़ेगा। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अपडेट में कहा गया है कि जो अल नीनो अभी बन रहा है, वह मध्यम दर्जे का होगा और काफी मजबूत भी हो सकता है। यह भारत के लिए मुश्किल बढ़ाने वाला होगा, क्योंकि भारत पहले से ही कमजोर मॉनसून का सामना कर रहा है।WMO ने यह भी कहा कि अल नीनो की स्थिति कम से कम नवम्बर तक बनी रहेगी। इसकी संभावना करीब 90% या उससे ज्यादा है। अल नीनो की घटना लगातार गर्म हो रही दुनिया के लिए और भयावह होने वाली है। इसके असर और ज्यादा दूर तक होंगे, जिसमें सूखा और फसलों की तबाही शामिल है। वहीं, दक्षिणी अमेरिका के क्षेत्रों में यह बहुत ज्यादा बारिश और बाढ़ का सबब बन सकता है।
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