भारत के दुश्मन पाकिस्तान को क्यों गले लगा रहे पुतिन, पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने बताया मॉस्को का छिपा एजेंडा
Updated on
08-06-2026 02:48 PM
मॉस्को: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का पाकिस्तान प्रेम हाल के दिनों में बढ़ा है। इसका साफ सबूत पिछले सप्ताह सेंट पीटर्सबर्ग में पाकिस्तान को लेकर उनकी टिप्पणी में मिलता है। भारतीय पत्रकार के पाकिस्तान को लेकर पूछे सवाल पर चीन ने जो कहा वह मॉस्को के इस्लामाबाद के प्रति नजरिए को दिखाता है। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि पाकिस्तान चीन के कंट्रोल में हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक बड़ा देश है, जिसके अलग-अलग देशों से संबंध हैं।
पुतिन ने इस्लामाबाद को लेकर खुली तारीफ की है, यह जानते हुए कि उनके पुराने दोस्त भारत के साथ पाकिस्तान की प्रतिद्वंद्विता है। इसके बावजूद पाकिस्तान में ही पुतिन के बयान का संदेह की नजर से देखा जा रहा है। पाकिस्तान में एक्सपर्ट ने इस बयान को रूस के अफगानिस्तान के साथ हालिया डिफेंस डील को सही ठहराने की कोशिश बताया है।
पुतिन के बयान पर बोले पाकिस्तानी एक्सपर्ट
पाकिस्तान के सुरक्षा विश्लेषक मोहम्मद आमिर राणा ने डॉन में लिखे लेख में कहा, पुतिन के बयान में एक छिपा हुआ संदेश था कि जैसे पाकिस्तान के चीन, अमेरिका और रूस के साथ संबंध हैं। मॉस्को भी देशों से जु़ड़ने में यही तरीका अपनाता है। रूस एकमात्र देश है, जिसने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को मान्यता दी है। तालिबान और पाकिस्तान के रिश्ते इस समय बेहद तनावपूर्ण हैं।
पाकिस्तान के लिए पुतिन का प्रेम क्यों?
अफगानिस्तान को लेकर पाकिस्तान की सतर्कता के बावजूद इस्लामाबाद और मॉस्को के रिश्ते आगे बढ़ रहे हैं। आमिर राणा पुतिन के पाकिस्तान प्रेम के पीछे की वजह बताते हैं कि मॉस्को के लिए इस्लामाबाद एक और वजह से महत्वपूर्ण हो गया है। वह है- ईरान और अमेरिका के बीच चल रही मध्यस्थता में उसकी सक्रिय भूमिका। पुतिन के लिए पाकिस्तान से नजदीकी बढ़ाने की एक और वजह है। उन्हें लगता है कि वह पाकिस्तान के जरिए वॉशिंगटन से जुड़ सकते हैं और संदेश भेज सकते हैं।
रूस-भारत के रिश्ते और पाकिस्तान
रूस ने पाकिस्तान के साथ रिश्ते बेहतर जरूर किए हैं, लेकिन भारत उसका अहम रणनीतिक सहयोगी बना हुआ है। पाकिस्तान के लिए यह चिंता करने वाली बात है। पाकिस्तान रूस को लंबे समय के जियो-पॉलिटिकल नजरिए से देखता है। राणा कहते हैं कि जब तक भारत के साथ रूस की रणनीतिक और रक्षा साझेदारी कमजोर नहीं हो जाती या अमेरिका के साथ भारत का रक्षा और रणनीतिक गठबंधन उस स्तर तक नहीं पहुंच जाता, जिससे मॉस्को अपनी भारत नीति की समीक्षा को मजबूर हो जाए, पाकिस्तान को इंतजार करना पड़ सकता है।
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