सीबीआई हिरासत में जापानी मर्डर मिस्ट्री ‘Butter’ पढ़ रहा समर्थ सिंह
Updated on
29-05-2026 01:12 PM
भोपाल। ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले में दहेज हत्या के आरोपों का सामना कर रहा अधिवक्ता समर्थ सिंह इन दिनों सीबीआई हिरासत में जापानी क्राइम थ्रिलर उपन्यास ‘Butter’ पढ़ रहा है।
रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह का बेटा समर्थ गिरफ्तारी के बाद से ही यह पुस्तक अपने साथ रखे हुए है।
गिरफ्तारी के बाद से ही पढ़ रहा है उपन्यास
बताया जा रहा है कि 22 मई को गिरफ्तारी के बाद कटारा हिल्स थाने की हवालात में रहते हुए वह किताब का आधे से अधिक हिस्सा पढ़ चुका था और अब सीबीआई रिमांड के दौरान शेष भाग पढ़ रहा है। कोर्ट परिसर में मौजूद उसके कुछ वकील मित्रों के अनुसार समर्थ को लंबे समय से अपराध, मनोविज्ञान और न्याय व्यवस्था से जुड़ी किताबें पढ़ने का शौक रहा है।
जापान की चर्चित ‘कोंकात्सु किलर’ घटना से प्रेरित है उपन्यास
बता दें कि वर्ष 2017 में प्रकाशित जापानी लेखिका असाको युजुकी ( Asako Yuzuki) का चर्चित उपन्यास बटर (Butter) जापान की बहुचर्चित "कोंकात्सु किलर" घटना से प्रेरित माना जाता है।
कहानी फूड ब्लॉगर और रसोइया मनाको काजी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिस पर कई संपन्न व्यापारियों की हत्या के आरोप लगते हैं। आरोप है कि वह स्वादिष्ट भोजन और भावनात्मक रिश्तों के जरिए पुरुषों को अपने प्रभाव में लेती थी।
उपन्यास में एक महिला पत्रकार जेल में बंद मनाको से संपर्क करती है और धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू होता है। इसी संवाद के जरिए अपराध, अकेलापन, समाज में महिलाओं की छवि और मानव मनोविज्ञान की जटिल परतें खुलती जाती हैं।
दिलचस्प बात यह भी है कि कहानी का केंद्रीय पात्र कई सनसनीखेज आरोपों के बावजूद अंततः अदालत में निर्दोष साबित होता है।
कानूनी रणनीति में चूक भी चर्चा में
ट्विशा केस में समर्थ सिंह की कानूनी रणनीतियां भी सवालों के घेरे में रही हैं। कानूनी अखाड़े का 'पहलवान', लेकिन रणनीति में कर बैठा बड़ी चूक-पत्नी ट्विशा की मौत मामले में समर्थ सिंह को कानूनी दांव-पेंच का माहिर खिलाड़ी माना जाता रहा, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में उसकी कई रणनीतिक गलतियां सामने आईं, जिन्होंने उसे साक्ष्यों को छिपाने के लिए संदिग्ध बना दिया।
घटना के तुरंत बाद पुलिस से दूरी बनाकर उसके द्वारा रसूखदारों से संपर्क साधने की कोशिश की। अग्रिम जमानत हासिल करने की कवायद शुरू की, लेकिन राहत नहीं मिलने पर फरार होना।
मामला भोपाल न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद जबलपुर कोर्ट में सरेंडर की कोशिश की। लगातार फरारी के कारण पुलिस द्वारा इनामी घोषित करना और फिर हंगामेदार गिरफ्तारी। यह सब ऐसे पहलु हैं, जो समर्थ से ट्विशा केस में जुड़े।
वकालत का लाइसेंस निलंबित होने के बाद समर्थ सिंह की पेशेवर छवि को भी बड़ा झटका लगा है। फिलहाल सीबीआई डिजिटल साक्ष्यों, कॉल डिटेल और घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़कर मामले की गहन जांच कर रही है।
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