आर माधवन: वेदांत भारतीय फिल्में नहीं देखना चाहता, उस समय चिंता बेटे का सम्मान हासिल करना था, अब चिंता अलग
Updated on
18-07-2026 01:55 PM
बॉलीवुड में अक्सर एक्टर के बेटे एक्टर बनने का ही सपना देखा करते हैं लेकिन इस मामले में आर माधवन के बेटे काफी अलग हैं। माधवन के बेटे वेदांत की दुनिया फिल्मों से काफी दूर है। आर. माधवन ने हाल ही में कहा कि उनके बेटे वेदांत और आज की युवा पीढ़ी का भारतीय फिल्मों से जुड़ाव लगातार कम होता जा रहा है।
उनके मुताबिक, आज के युवा तमिल, हिंदी या दूसरी भारतीय फिल्मों की बजाय जापानी एनीमे और कोरियाई कंटेंट देखना ज्यादा पसंद करते हैं।
माधवन ने कहा कि भारतीय सिनेमा के सामने यह बड़ी चुनौती
अपनी आने वाली फिल्म 'जीडीएन' के प्रमोशन के दौरान दिए एक इंटरव्यू में माधवन ने कहा कि भारतीय सिनेमा के सामने यह बड़ी चुनौती बन गई है। उनका मानना है कि युवा दर्शक किसी दूसरी फिल्म इंडस्ट्री की वजह से नहीं, बल्कि अलग तरह की कहानी और कंटेंट की दुनिया की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
जब वेदांत छोटा था, तब वे सोचते थे कि ऐसी फिल्म बनाएं
माधवन ने कहा कि उनका 20 साल का बेटा वेदांत उनका सम्मान करता है लेकिन भारतीय फिल्में देखने में उसकी कोई खास रुचि नहीं है। उन्होंने बताया कि यह बात उन्हें लंबे समय से परेशान करती रही है। उन्हें याद है कि जब वेदांत छोटा था, तब वे सोचते थे कि ऐसी फिल्म बनाएं जिसे देखकर बेटा उनकी तारीफ करे, लेकिन अब हालात बदल गए हैं और नई पीढ़ी का रुझान ही अलग हो चुका है।
माधवन ने कहा- मुझे एक डर सताता है जिसके बारे में मैं सोचना भी नहीं चाहता
उन्होंने कहा, 'मुझे एक डर सताता है जिसके बारे में मैं सोचना भी नहीं चाहता। बेशक, अब तक मुझे उससे रिस्पेक्ट मिला है। अब वे 20 साल के हैं लेकिन अगर आप मेरी युवा पीढ़ी को देखें, तो वे उनसे पूरी तरह से कटे हुए हैं।' माधवन खुद को थर्ड पर्सन की तरह बताते हुए कहा, 'यह एक बड़ी समस्या है। वे जापानी एनीमे देखते हैं, वे कोरियाई कंटेंट देखते हैं लेकिन वे हमारी तमिल फिल्में भी नहीं देखना चाहते। वे हिंदी फिल्में या भारतीय फिल्में देखने के लिए थिएटर भी नहीं जाते।'
माधवन बोले- अब बेटे को लेकर अलग चिंता
माधवन ने कहा कि यह डिस्कनेक्ट उनके मन में वर्षों से बना हुआ है। उन्होंने उस समय को याद किया जब वेदांत छह साल का था और सोचने का तरीका कहीं अधिक सरल था। उन्होंने कहा, 'एक छह साल का लड़का मेरे पास आता है और मैं सोच रहा होता हूं कि उसके लिए फिल्म कैसे बनाऊं। वह कोई फिल्म देखेगा और फिर मुझसे कहेगा- आपने अच्छा काम किया है।’ उन्होंने कहा, 'उस समय चिंता बेटे का सम्मान हासिल करने की थी। अब चिंता अलग है।'
केवल फॉर्मूला फिल्मों के भरोसे दर्शकों को जोड़े रखना संभव नहीं
एक्टर ने माना कि अगर वह सिर्फ मसाला और कमर्शियल फिल्में करें तो हिट फिल्म देना मुश्किल नहीं है। लेकिन उन्होंने हमेशा ऐसी कहानियां चुनने की कोशिश की, जिनमें एक्टिंग की गहराई हो और कुछ नया कहने का मौका मिले। उनके अनुसार, केवल फॉर्मूला फिल्मों के भरोसे लंबे समय तक दर्शकों को जोड़े रखना संभव नहीं है।
यह समस्या सिर्फ तमिल सिनेमा तक सीमित नहीं
माधवन ने आगे कहा कि यह समस्या सिर्फ तमिल सिनेमा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया में देखने को मिल रही है। उनका मानना है कि फिल्म बनाने वालों को ऐसी कहानियां और किरदार पेश करने होंगे जो लोगों को प्रेरित करें और नई पीढ़ी को फिर से भारतीय सिनेमा से जोड़ सकें।
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