भोपाल एम्स में मरीजों के अटेंडेंट्स को नहीं भटकना होगा बाहर, तीमारदारों के लिए बनेगा 500 बेड का अत्याधुनिक विश्राम सदन
Updated on
12-06-2026 12:11 PM
भोपाल। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ( एम्स ) भोपाल में इलाज कराने आने वाले गंभीर मरीजों के परिजनों और तीमारदारों (अटेंडेंट्स) के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है।
अस्पताल परिसर में अब किसी भी तीमारदार को कड़कड़ाती ठंड, तपती गर्मी या बारिश के बीच बरामदों, गलियारों या फुटपाथों पर रात नहीं गुजारनी पड़ेगी। एम्स प्रबंधन संस्थान परिसर में ही मल्टीलेवल पार्किंग के ठीक बगल में 500 बेड की क्षमता वाला एक विशाल और अत्याधुनिक विश्राम सदन बनाने जा रहा है।
इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील परियोजना का निर्माण कार्य इसी महीने यानी जून 2026 के अंतिम सप्ताह से शुरू कर दिया जाएगा, जिसे आगामी एक साल (2027) के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
ऐसी होंगी विश्राम सदन की सुविधाएं
एम्स भोपाल में रोजाना औसतन 7 से 8 हजार मरीज ओपीडी और आईपीडी में इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें से एक बड़ी संख्या मध्य प्रदेश के दूरस्थ जिलों, आदिवासी अंचलों और पड़ोसी राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़) से आने वाले आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों की होती है। उनके परिजनों को ध्यान में रखकर इस विश्राम सदन का खाका खींचा गया है।
कमरों के विकल्प: नए विश्राम सदन में सामूहिक डॉरमेट्री के अलावा व्यक्तिगत जरूरत के हिसाब से एक, दो और चार बेड वाले विशेष कमरे भी बनाए जाएंगे।
बुनियादी सुविधाएं: सभी कमरे पूरी तरह साफ-सुथरे, सुरक्षित, हवादार और सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाओं (जैसे लॉकर, स्वच्छ पेयजल और शौचालय) से युक्त होंगे।
रियायती दरें: तीमारदारों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए यहां ठहरने का शुल्क बेहद मामूली और रियायती रखा जाएगा, ताकि कोई भी गरीब इसका लाभ उठा सके।
इस पूरे प्रोजेक्ट को सामाजिक सरोकार के तहत 'सेवाद्वार आरोग्य फाउंडेशन' के संयुक्त सहयोग और वित्तीय भागीदारी से विकसित किया जा रहा है।
डॉक्टर की अनुशंसा पर एंट्री
विश्राम सदन की व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित रखने के लिए एम्स प्रबंधन ने एक विशेष नियम बनाया है। सदन में केवल उन्हीं तीमारदारों को कमरा या बेड अलॉट किया जाएगा, जिनके पास मरीज का इलाज कर रहे डॉक्टर की विशेष अनुशंसा होगी।
इससे उन जरूरतमंदों को प्राथमिकता मिलेगी जिनके मरीज लंबे समय से अस्पताल में भर्ती हैं और जिन्हें बाहर महंगे होटल या कमरे किराए पर लेने पड़ते हैं।
हमीदिया में भी है प्रस्ताव
एम्स प्रबंधन का मानना है कि इलाज की तरह ही परिजनों के रहने की व्यवस्था भी चिकित्सा सुविधाओं का ही एक अनिवार्य हिस्सा है।
इसी तर्ज पर भोपाल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया में भी ऐसा ही विश्राम सदन बनाने का प्रस्ताव शासन स्तर पर तैयार है, हालांकि वहां फिलहाल उपयुक्त जमीन का चयन होना बाकी है।
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