खत्म होने वाला है 'सिंगल पायलट' स्टील्थ फाइटर्स का दौर? चीन के बाद रूस ने बदली रणनीति, भारत का दूरदर्शी फैसला
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23-05-2026 02:22 PM
मॉस्को/नई दिल्ली: भारत और रूस ने एक वक्त दो सीटों वाले स्टील्थ फाइटर जेट बनाने की योजना बनाई थी। उस प्रोग्राम का नाम फिफ्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट (FGFA) था। इस प्रोग्राम के जरिए Su-57 के दो सीटों वाले वेरिएंट बनाने की योजना बनाई गई थी। एनबीटी आनलाइन से बात करते हुए पिछले दिनों भारतीय वायुसेना के पूर्व पायलट और एविएशन आर्किटेक्ट विजयेन्द्र के ठाकुर ने कहा था कि भारतीय वायुसेना हमेशा से दो सीटों वाला फाइटर जेट चाहती रही है। उन्होंने कहा था कि दरअसल स्टील्थ फाइटर जेट सिर्फ एक चीज नहीं है जो भारतीय वायुसेना को चाहिए थी बल्कि हमेशा से दो सीटों वाले स्टील्थ लड़ाकू विमानों की रही है।
रूस ने पिछले हफ्ते दो सीटों वाले स्टील्थ फाइटर जेट Su-57D का कामयाब ट्रायल कर लिया है जिसके बाद भारतीय डिफेंस डोमेन में चर्चा शुरू हो गई है कि क्या ये वही फाइटर जेट है जो भारत को चाहिए थी? दिलचस्प ये भी है कि जिस दो सीटों वाले Su-57D का फ्लाइट ट्रायल हुआ है उसके कॉकपिट का डिजाइन Su-30MKI की तरह है जिसे भारतीय वायुसेना ऑपरेट करती है। वहीं यूरेशियन टाइम्स में विजयेन्द्र के ठाकुर ने लिखा है कि दो सीटों वाला फाइटर जेट कई तरह के जटिल ऑपरेशन के लिए जरूरी होते हैं। इससे इलेक्ट्रॉनिक युद्ध/हमले की भूमिकाओं और टोही अभियानों में फायदा मिलता है।
सिंगल सीट और डबल सीट वाले विमानों के साथ अपनी अपनी दिक्कतें
दो सीटों वाले स्टील्थ फाइटर जेट के साथ एक बड़ी दिक्कत होती है कि ऐसा करने से स्टील्थ क्षमता के साथ कुछ हद तक समझौता हो जाता है।
इससे अंदरूनी फ्यूल ले जाने की क्षमता कम हो जाती है जिससे फाइटर की रेंज पर असर पड़ता है। (स्टेल्थ फाइटर बाहर से, ड्रॉप टैंक में फ्यूल नहीं ले जा सकते।)
अमेरिका ने अपने F-22 और F-35 स्टील्थ फाइटर जेट को इन्हीं सब वजहों से सिंगल सीट विमान ही रखा लेकिन चीन ने अपने J-20 स्टील्थ फाइटर जेट को 2 सीटों वाला विमान बनाया है।
इंजीनियर्स का मानना था कि सिंगल फाइटर विमानों को मुख्य रूप से ऐसे हवाई क्षेत्र में घुसने के लिए डिजाइन किया गया था जहां दुश्मन का कब्जा हो। यह माना गया था कि 'सेंसर फ्यूजन' तकनीक इतनी काफी होगी कि एक ही पायलट ऐसे मिशन को पूरा कर सके।
जबकि दो सीटों वाले स्टेल्थ फाइटर से सिस्टम और भी ज्यादा पेचीदा हो जाएगा। कुछ मामलों में अंदरूनी फ्यूल या पेलोड ले जाने की क्षमता कम हो जाएगी और 'रडार क्रॉस-सेक्शन' (रडार पर दिखाई देने का आकार) बढ़ जाएगा। जिससे दुश्मन इसे ट्रैक कर सकते हैं।
विजयेन्द्र के ठाकुर ने यूरेशियन टाइम्स में लिखा है कि इतने साल बीतने के बाद अब ये बात साफ हो चुकी है कि सिर्फ सिंगल-सीट वाले स्टेल्थ फाइटर चुनने के फैसले में Manned-Unmanned Teaming (MUM-T) ऑपरेशन्स की जरूरत पड़ने की संभावना का अंदाजा नहीं लगाया गया था। यानि स्टील्थ विमानों के साथ ड्रोन ऑपरेशंस।
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