बांग्लादेश के पूर्व विदेश सलाहकार ने खोली मोहम्मद यूनुस की पोल, कहा-शेख हसीना की होगी वापसी, कई खुलासे
Updated on
26-05-2026 01:02 PM
ढाका: बांग्लादेश की पूर्ववर्ती मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में चलने वाली अंतरिम सरकार को लेकर कई बड़े खुलासे किए गये हैं। अंतरिम सरकार में विदेश मामलों के सलाहकार रहे तौहीद हुसैन ने आरोप लगाया है कि सात सदस्यों वाली एक "किचन कैबिनेट" ही असल में अंतरिम सरकार के अहम फैसले ले रही थी और इसकी बैठकें हर मंगलवार को होती थीं। जमुना टीवी को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें ऐसे किसी व्यवस्थित, अनौपचारिक निर्णय लेने वाले समूह के अस्तित्व के बारे में कोई जानकारी नहीं थी लेकिन सरकारी हलकों में इसके प्रभाव की व्यापक चर्चा थी। सात लोग तय करते थे कि सरकार के फैसले क्या होंगे।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के पूर्व विदेश सलाहकार ने यह दावा भी किया कि कई सलाहकारों का उनके मंत्रालय पर काफी दबदबा था। तौहीद ने बताया कि उन्होंने तंग आकर तीन मौकों पर इस्तीफा देने पर विचार किया था लेकिन उन्हें रुकने के लिए मना लिया गया। अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि इससे सरकार के लिए "गंभीर असहजता" पैदा हो सकती है।
क्या यूनुस सरकार को चला रहा था 'डीप स्टेट'?
राजनीतिक घटनाक्रमों में "डीप स्टेट" की संलिप्तता को लेकर चल रही अटकलों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे तत्व अक्सर दुनिया भर में मौजूद होते हैं लेकिन वे आमतौर पर मौजूदा राजनीतिक धाराओं का विरोध करने के बजाय उन्हें अपने हिसाब से ढालकर काम करते हैं। इसके अलावा तौहीद हुसैन ने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के जाने से ठीक एक हफ्ते पहले अमेरिका के साथ हुए सीक्रेट डील से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने विदेश मंत्रालय को अमेरिका के साथ चुनाव से ठीक पहले पूर्व व्यापार समझौते से भी अलग कर लिया। उन्होंने कहा कि इस समझौते को वाणिज्य मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने संभाला था न कि उनके कार्यालय ने।
राजनीति के विषय पर पूर्व सलाहकार ने संकेत दिया कि अवामी लीग के राजनीतिक परिदृश्य से स्थायी रूप से बाहर रहने की संभावना कम ही है। उन्होंने भविष्यवाणी की कि आखिरकार अवामी लीग की राजनीति में फिर से वापसी होगी और वह अगले चुनाव में संभवतः हिस्सा लेगी। हालांकि उन्होंने BNP के नेतृत्व वाली संभावित सरकार का पूरा आकलन करने से इनकार कर दिया लेकिन यह जरूर कहा कि अमेरिका, चीन और भारत के साथ संबंधों को संभालना उसके नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
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