खुद की CR पर खुद ही कराओ साइन; भोपाल नगर निगम के इस आदेश पर भड़के कर्मचारी, प्रमोशन की 350 फाइलें अटकीं
Updated on
19-07-2026 12:58 PM
भोपाल। भोपाल नगर निगम में चल रही पदोन्नति (प्रमोशन) प्रक्रिया के बीच प्रशासन ने एक ऐसा नया फरमान जारी किया है, जिसने कर्मचारियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। नए निर्देशों के अनुसार, अब अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी गोपनीय चरित्रावली (सीआर) खुद पूरी करानी होगी।कर्मचारियों को खुद उन अधिकारियों के पास जाकर हस्ताक्षर (साइन) करवाकर लाने होंगे, जिनके अधीन उन्होंने पूर्व में काम किया था। नगर निगम प्रशासन के इस आदेश के बाद से कर्मचारियों में भारी नाराजगी और असंतोष देखा जा रहा है।
650 में से 350 मामलों में CR ही अधूरी
निगम में इस समय पदोन्नति के कुल 650 मामलों पर विचार किया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 350 कर्मचारियों और अधिकारियों की सीआर अब तक बनकर तैयार ही नहीं हो सकी है। वहीं, जिन कर्मचारियों की सीआर तैयार हो चुकी है, उन्हें भी एक अन्य अधिकारी के हस्ताक्षर कराने के लिए मूल सीआर सौंप दी गई है।
इस पेंडेंसी को खत्म करने के लिए निगम मुख्यालय में देर रात तक सीआर तैयार करने का काम चल रहा है।
कर्मचारियों ने उठाए सवाल
प्रशासन के इस फैसले को कर्मचारियों ने पूरी तरह से अव्यावहारिक बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है। कर्मचारियों का तर्क है कि:
-गोपनीयता पर संकट: सीआर एक बेहद गोपनीय दस्तावेज होता है। इसे सीधे कर्मचारी के हाथ में सौंपना और उसी से साइन कराने के लिए कहना सेवा नियमों के विपरीत और अनुचित है।
-अधिकारियों का न मिलना: पूर्व में जिन अधिकारियों के अधीन काम किया था, उनमें से कई अधिकारियों का तबादला हो चुका है या वे सेवानिवृत्त (रिटायर) हो चुके हैं। ऐसे में उनसे संपर्क कर हस्ताक्षर करवाना कर्मचारियों के लिए बेहद मुश्किल काम होगा।
'सीआर लिखना विभाग का काम, फिर कर्मचारियों पर बोझ क्यों?'
नियमों के अनुसार, कर्मचारियों की वार्षिक गोपनीय चरित्रावली (सीआर) तैयार करना पूरी तरह से संबंधित विभाग की जिम्मेदारी होती है और इसे हर साल नियमित रूप से लिखा जाना चाहिए।
प्रशासन की इस लापरवाही का सबसे अधिक खामियाजा तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। इन कर्मचारियों को दो-दो अधिकारियों के हस्ताक्षर खुद कराने के निर्देश दे दिए गए हैं, जिसके कारण वे काम छोड़कर दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
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