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नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं को होगी सुविधा:3500 किमी में कितने आश्रम-सामाजिक भवन, दो माह में होगा सर्वे

Updated on 03-04-2025 05:24 PM

मध्य प्रदेश में नर्मदा परिक्रमा पथ निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही थी। अब सरकार ने इस पर काम शुरू कर दिया है। एक महीने पहले मनरेगा द्वारा सिप्री नामक सॉफ्टवेयर बनाया गया है। इसके जरिए परिक्रमा पथ का चिह्नांकन किया जा रहा है। इस सॉफ्टवेयर से पता लगाया जा रहा है कि कहां पुलिया, कच्ची सड़क और पक्का मार्ग बना हुआ है।

कहां नई सड़क या पुलिया की जरूरत है, इसका भी आकलन किया जा रहा है। जहां आवश्यक होगा, वहां निर्माण कराया जाएगा। इसके साथ ही, नर्मदा किनारे बने मंदिरों, आश्रमों, सामाजिक भवनों और टॉयलेट की मैपिंग भी की जा रही है। इससे यात्रियों को पहले से इनकी जानकारी मिल सकेगी।

नर्मदा नदी की कुल लंबाई लगभग 1314 किमी है। परिक्रमा के दौरान यह दूरी 3500 किमी हो जाती है। इसमें से 2000 किमी का हिस्सा मध्य प्रदेश में आता है। बाकी मार्ग महाराष्ट्र और गुजरात में है। फिलहाल, मध्य प्रदेश सरकार सिर्फ 2000 किमी का चिह्नांकन करवा रही है। इसमें से 1500 किमी का काम पूरा हो चुका है। यात्रियों के लिए सुविधाएं जुटाने का काम पहले ओंकारेश्वर और महेश्वर से शुरू होगा। लगभग 50% पैदल परिक्रमा इन्हीं तीर्थ स्थलों से शुरू होती है।

डेढ़ एकड़ में बनेगा आश्रय स्थल

नर्मदा किनारे करीब डेढ़ एकड़ में आश्रय स्थल बनाया जाएगा। इसमें पेड़-पौधे लगाए जाएंगे और रुकने-ठहरने की अच्छी व्यवस्था होगी। रेडी-टू-स्टे आश्रय स्थल की 7 लेयर की छत होगी, जिससे इसे मजबूती मिलेगी। यह छत बल्ली, बांस, मिट्टी, मिट्टी के खप्पड़ जैसी पांच लेयर से बनाई जाएगी।

इसमें मिट्टी और गोबर का लेपन किया जाएगा। इससे परिक्रमा करने वालों को आध्यात्मिकता का अनुभव होगा। चातुर्मास करने वालों के लिए विशेष व्यवस्था होगी। इस काम में नर्मदा परिक्रमा करने वाले लोग और समितियां भी शामिल हो सकती हैं।

ऐसा होगा सॉफ्टवेयर...

 नर्मदा परिक्रमा पथ को चिन्हित करने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सॉफ्टवेयर बनाया है। इसे जियोग्राफी इंफॉर्मेशन सिस्टम से जोड़ा गया है। इस सॉफ्टवेयर का निर्माण रोजगार गारंटी परिषद (मनरेगा) ने किया है। मनरेगा एमआईएस के इंचार्ज ओवेश अहमद ने बताया कि एक महीने से सर्वे चल रहा है।

सॉफ्टवेयर में एक एप भी लिंक किया गया है। इसमें परिक्रमा पथ के किनारे आने वाले धार्मिक स्थान, आश्रम, सामाजिक भवन और टॉयलेट की लोकेशन जोड़ी जा रही है। सर्वे का काम एक से दो महीने में पूरा हो जाएगा। इसके बाद अन्य कार्य शुरू होंगे।



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