द्वितीय दिवस में दंतेवाड़ा से यात्रा सुकमा और बीजापुर जिले के विभिन्न नक्सल प्रभावित एवं दुर्गम क्षेत्रों से होकर आगे बढ़ेगी। यात्रा का उद्देश्य इन क्षेत्रों में शांति, विकास और राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ाव का संदेश पहुंचाना है। यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों से संवाद और क्षेत्र के विकास की संभावनाओं को भी करीब से समझने का प्रयास किया जाएगा।
कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर होगा यात्रा का समापन
बस्तर तिरंगा यात्रा का तृतीय एवं अंतिम चरण बीजापुर से प्रारंभ होगा। यात्रा आवापल्ली, उसूर, गलगम, नंबी और ताड़पाला होते हुए कर्रेगुट्टा पहाड़ी तक पहुंचेगी, जहां यात्रा का समापन होगा। कर्रेगुट्टा जैसे दुर्गम क्षेत्र में तिरंगा पहुंचना बस्तर में बदलते वातावरण, शांति की स्थापना और विकास की नई संभावनाओं का प्रतीक माना जा रहा है।
बस्तर तिरंगा यात्रा के माध्यम से बस्तर की धरती पर ‘नक्सलवाद से आजादी, विकास की ओर बस्तर’ का संदेश दिया जा रहा है। तिरंगे की शान के साथ आगे बढ़ रही यह यात्रा बस्तर के लोगों के विश्वास, साहस और नए भविष्य की आकांक्षाओं को भी स्वर दे रही है।